बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

उत्तराखंड के हल्दवानी के 41 प्रशिक्षु रेंजरों ने रविवार को कानन पेंडारी जू का अध्ययन भ्रमण किया। डीएफओ व अधीक्षक ने उन्हें जू के प्रबंधन और वन्यप्राणियों की देखभाल से जुड़ी जानकारी दी। इसके साथ ही पर्यटकों को उपलब्ध कराई जानी वाली सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। यह भ्रमण कार्यक्रम उनके प्रशिक्षण का प्रमुख हिस्सा है।

प्रशिक्षुओं को परिपक्व करने के लिए इस तरह के भ्रमण कार्यक्रम देशभर में आयोजित होते हैं। छत्तीसगढ़ से भी प्रशिक्षण प्राप्त करने रेंजर, फारेस्टर व फारेस्ट गार्ड को दूसरे राज्यों में भेजा जाता है। उत्तराखंड के प्रशिक्षुओं का कार्यक्रम पहले से निर्धारित था। इसलिए उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए डीएफओ सत्यदेव शर्मा, अधीक्षक वीके चौरसिया और जू प्रभारी एचसी शर्मा सुबह ही कानन पेंडारी पहुंच गए। सुबह 11.30 बजे के करीब प्रशिक्षुओं का दल जू पहुंचा। आधे घंटे बाद उनका अध्ययन शुरू हो गया। पहले चरण में सभी को वन्यप्राणियों और उनके लिए बनाए गए केज दिखाए गए। केज के मापदंड व क्या सुविधाएं होनी चाहिए, इस बारे में एक-एक बिंदु स्पष्ट किया गया। इस दौरान उनकी जिज्ञासा भी शांत की गई। उन्हें बताया कि कानन पेंडारी अभी स्माल जू का दर्जा प्राप्त है। यहां वन्यप्राणी व पर्यटकों की संख्या मीडियम जू स्तर की है। बहुत जल्द कानन पेंडारी का कद बढ़ने वाला है। इसके बाद और क्या-क्या कार्य होंगे, उसे भी बताया गया। इसके साथ ही मांसाहारी व शाकाहारी वन्यप्राणियों को प्रतिदिन कितनी बार व कितना आहार दिया जाता है, यह बताया गया। प्रशिक्षुओं को जू का अस्पताल भी दिखाया गया। यहां वन्यप्राणियों का उपचार कैसे किया जाता है, इस बारे में उन्हें विस्तार से जानकारी दी गई। जू में किस काम के लिए कितने जू कीपर व अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं। यह प्रशिक्षण के दौरान बताया गया। दूसरे चरण में पर्यटकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाएं, पेयजल, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे, नाम का बोर्ड, बैटरी कार, दिव्यांग पर्यटकों के लिए व्हीलचेयर दिखाया गया है। प्रशिक्षु जू की व्यवस्था से बेहद प्रभावित भी हुए।

भरनी प्लांटेशन भी देखे

प्रशिक्षुओं को दोपहर में कोटा मार्ग पर स्थित भरनी में 2017 में हुआ प्लांटेशन भी दिखाया गया। हरियर छत्तीसगढ़ योजना के तहत इस प्लांटेशन में 15 प्रजाति के 26 हजार पौधे रोपे गए थे, जो अब पेड़ बन गए हैं। दरअसल यहां नई तकनीक से दो मीटर ऊंचे पौधे लगाए गए थे। वर्तमान में 95 प्रतिशत पौधे जीवित हैं और पेड़ बन रहे हैं। यह प्लांटेशन जू के तत्कालीन रेंजर टीआर जायसवाल ने किया था। जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। प्रशिक्षुओं को बेहतर जानकारी मिल सके, इसलिए जायसवाल को बुलाया गया। उन्होंने प्लांटेशन की विधि बताई।

आज एटीआर का अध्ययन

प्रशिक्षु रेंजर 17 फरवरी को अचानकमार टाइगर रिजर्व का भ्रमण करेंगे। उन्हें टाइगर रिजर्व में संचालित बस से घूमाया जाएगा। इस दौरान वन अफसर पहले उन्हें टाइगर रिजर्व क्या है, इस बारे में समझाएंगे। इसके साथ जंगल के अंदर वन्यप्राणियों को कैसे सुरक्षित रखते हैं, इसकी जानकारी देंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network