बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जोनल स्टेशन में सन्नाटा पसरा है। न यात्री है और न कर्मचारी नजर आ रहे हैं। इसके बाद भी रेलवे का सुरक्षा बल सामान्य दिनों की तरह स्टेशन के चप्पे -चप्पे की निगरानी कर रहा है ताकि रेल संपत्ति को कोई क्षति न पहुंचा सके। सबसे बड़ी जिम्मेदारी मालगाड़ी की मॉनिटरिंग की है। क्योंकि अभी यही एक साधन है। इसके चलते कोयला व खाद्यान्न सामग्री अलग-अलग शहरों तक पहुंच रही है। यदि कहीं लूटपाट हो गई तो समस्या बढ़ सकती है।

यह घड़ी आरपीएफ के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। ट्रेनों के रद होने से चोरी या मारपीट जैसी आशंका तो नहीं है लेकिन असामाजिक तत्व रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सबसे ज्यादा खतरा मालगाड़ी से सप्लाई हो रही सामान की है। मालगाड़ी का पहिया न थमे इसलिए जहां चालक, सहायक चालक व गार्ड कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं वहीं जिस पटरी पर मालगाड़ी दौड़ रही है उसमें तकनीकी कमी न आए इसलिए ट्रैकमैन तपती धूप में डटे हैं। ऐसे में आरपीएफ पर जिम्मेदारी बढ़ गई है। वे अन्य रेलकर्मियों की तरह कोरोना वायरस की खौफ के बीच बचाव के सारे उपाय अपना कर फील्ड पर तैनात हैं। ड्यूटी रोस्टर के हिसाब से अमला उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इसके बाद जिसे जहां तैनात रहने की जवाबदारी मिल रही है बिना सवाल किए पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं ड्यूटी के दौरान पल- पल की गतिविधियों की भी जानकारी दे रहे हैं। सभी जवानों को आदेश है कि सुरक्षा के साथ- साथ खुद की रक्षा के लिए सावधानी जरूरी है। इसलिए मास्क व सैनिटाइजर के साथ रहें। इन व्यवस्थाओं के बीच हर दिन 100 जवान जोनल स्टेशन से लेकर यार्ड और अन्य छोटे स्टेशनों में ड्यूटी कर रहा है। एक शिफ्ट 30 जवानों को तैनात किया जा रहा है। एक कर्मचारी भी 180 कैमरों से स्टेशन की चप्पे की निगरानी कर रहा है। आरपीएफ की सक्रियता का नतीजा है कि दो दिन पहले एर्नाकुलम एक्सप्रेस से अचानक पहुंचे 237 मजदूर बिलासपुर स्टेशन में फंस गए। यदि सुरक्षा अमला नहीं होता तो मजदूर भटक सकते थे।

हाथ धोकर पोस्ट में उपस्थिति

वायरस का खतरा देखते हुए आरपीएफ पोस्ट में कुछ जरूरी इंतजाम किए गए हैं। पोस्ट के बाहर पानी, साबुन व सैनिटाइजर रखा गया है। इस व्यवस्था के तहत उपस्थिति दर्ज कराने से पहले जवान साबुन से हाथ धोते हैं। इसके बाद ही प्रवेश करते हैं। पोस्ट के अंदर में सभी को उपस्थिति दर्ज कराते समय दूर- दूर खड़ा किया जाता है।

जोन में 1500 कर्मचारी कर रहे निगरानी

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ साकेत रंजन ने बताया कि जोन में अभी 1500 स्टाफ है। सभी पूरी ईमानदारी के साथ कर्तव्यों को पूरा कर रहे हैं। अभी रेल संपत्ति को ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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