बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

लॉकडाउन का सबसे बुरा असर शहर में खुले घूमने वाले बेसहारा जानवरों पर भी पड़ा है। उनके खाने की कोई व्यवस्था नहीं होने से भूखे ही इधर उधर भटक रहे हैं। ऐसे में कई संगठन और आम लोग इनकी मदद के लिए सामने आए हैं। कुछ लोग घरों से चावल आदि पकाकर उन्हें खिला रहे हैं तो कुछ ने पशु चारा खरीदकर उसे बांटना शुरू कर दिया है। इस विपरीत समय में शहर के लोग इंसानों की ही नहीं बेजुबानों की भी सुध ले रहे हैं।

इंसानों और पालतू जानवरों का पूरा सर्कल अनजाने में ही काम करता है। शहर में घूमने वाल बेसहारा मवेशी हो या कुत्ते अनजाने में ही लोग इनके भोजन की व्यवस्था कर देते थे। कुछ सड़क किनारे लगने वाले ठेले पर निर्भर होते हैं तो कुछ सब्जी बाजार से अपना पेट भर लेते थे। लॉकडाउन होने से उनके सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। शहर में न तो ठेले लग रहे हैं और न ही सब्जी बाजार में ज्यादा किसान आ रहे हैं। ऐसे में उनके भोजन की एक अघोषित श्रृंखला टूट गई है। इंसान तो किसी तरह अपने लिए खाद्य सामग्री जुटा लेता है लेकिन बेजुबान मवेशी और कुत्तों के सामने भोजन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में शहर के कुछ जागरूक लोगों ने उनके पेट भरने का भी इंतजाम करना शुरू कर दिया है। कुछ परिवार के लोग अपने घरों में ही चावल आदि बनाकर मवेशी और कुत्तों को बांटने के लिए सड़क पर निकल पड़ते हैं। लॉकडाउन की व्यवस्था संभालने के लिए तैनात पुलिस वाले भी उनका सहयोग कर रहे हैं। कोई पशु चारा लाकर चौक-चौराहों में छोड़ देता है तो कुछ पशुओं को ढूंढकर अपने सामने खाना खिला रहा है। शहर के लोग मूक जानवरों की भी इस विपरीत समय में सुध ले रहे हैं। यह सभी के लिए राहत और सुकून देने वाली खबर है। इसी तरह कुत्तों को भी लोग भोजन करा रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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