बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

श्रमवीरों की आहट मात्र से ही जिला प्रशासन के अफसरों का दिल धड़कने लगा है। मस्तूरी और बिल्हा ब्लॉक में आने वाले दिनों में जब श्रमिकों के आने की रफ्तार बढ़ेगी तब क्या होगा। इसे लेकर जिला व पुलिस प्रशासन के आला अफसर पसोपेश में नजर आने लगे हैं। मस्तूरी ब्लॉक में बीते दिनों तीन हजार श्रमिक बाहरी राज्यों से आए हैं। 45 हजार के करीब श्रमिक यहां आएंगे। इतने श्रमिकों को क्वारंटाइन में रखने के लिए व्यवस्था नहीं की गई है। या यूं कहें कि इतनी बड़ी तादाद में आने वाले श्रमिकों को 14 दिनों तक क्वारंटाइन में रखने ब्लॉकों में सरकारी भवन ही नहीं है।

मस्तूरी ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों से देश के अलग-अलग राज्यों में रोजी मजदूरी की तलाश में 45 हजार श्रमिक गए हैं। जिला प्रशासन ने ब्लॉक के अंतर्गत सरकारी स्कूलों सहित अन्य भवनों को मिलाकर 131 क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। सेंटरों में तकरीबन 22 हजार श्रमिकों को ठहराने की व्यवस्था की गई है। 23 हजार श्रमिकों को कहां ठहराया जाए इसे लेकर जिला प्रशासन के अफसर असमंजस की स्थिति में है। मस्तूरी ब्लॉक में प्राइमरी,मिडिल के अलावा हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल,पंचायत भवन,ग्राम पंचायत सचिवालय व सामुदायिक भवनों को क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील कर दिया है। बीते आठ दिनों के भीतर ब्लॉक से तीन हजार श्रमिकों की अन्य प्रांतों से वापसी हुई है। सभी को क्वारंटाइन कर दिया गया है। संभावना जताई जा रही है कि जून के प्रथम पखवाड़े में बड़ी तादाद में पूरे प्रदेश में श्रमिकों की वापसी होगी। तब मस्तूरी के साथ ही जिले के अन्य ब्लॉकों में भी श्रमिकों को क्वारंटाइन सेंटर में रखने की एक बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने रहेगी। जिले के तीन ब्लॉक बिल्हा,मस्तूरी व तखतपुर से बड़ी संख्या में मजदूरों ने पलायन किया गया है। कोरोना का संक्रमण के कारण इनकी समय से पहले वापसी हो गई है। कोरोना का भय नहीं रहता तो श्रमिक जून के पहले पखवाड़े में वापसी करते। जिले के अमूमन सभी श्रमिक परंपरागत तरीके से पलायन करते हैं। आमतौर पर ये हर साल बाहर जाते हैं। मसलन अगर बिल्हा ब्लॉक के किसी गांव का मजदूर परिवार सहित जम्मू जा रहा है तो वह जम्मू ही जाते हैं। खेती बाड़ी के समय इनकी वापसी होती है। धान की कटाई और मिसाई के बाद ये फिर पलायन के लिए कूच कर जाते हैं। दिवाली मनाने के बाद पलायन करने वाले ग्रामीण खेती किसानी के समय वापसी करते हैं।

प्रशासन की नजर कोटा ब्लॉक की ओर

जिला प्रशासन की नजर कोटा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों की ओर लगी है। प्रशासन की कोशिश है कि शेष 23 हजार श्रमिकों को कोटा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए सेंटरों में शिफ्ट कर दिया जाए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी सूची में मस्तूरी ब्लॉक रेड जोन में है और कोटा को आरेंज जोन में शामिल किया गया है। प्रशासनिक अफसरों की चिंता ये कि मस्तूरी ब्लॉक के रेड जोन में आने के बाद यहां के प्रवासी श्रमिकों को कोटा या फिर जिले के किसी भी अन्य ब्लॉक के सेंटरों में क्वारंटाइन किए जाने पर ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

रेड जोन से पहुंचे श्रमिक

वर्तमान में मस्तूरी ब्लॉक में जिन श्रमिकों की वापसी हुई है वह सभी रेड जोन से आए हैं। इसके कारण क्वारंटाइन सेंटर वाले गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। क्वारंटाइन सेंटर में ठहरे एक श्रमिक के कोरोना पॉजेटिव मिलने के बाद आसपास के इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि सावधानी के तौर पर जिला प्रशासन ने लिमतरा और आसपास के इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित करते हुए सीमा सील कर दी गई है। लोगों को घरों से निकलने नहीं दिया जा रहा है।

मस्तूरी रेड जोन में शामिल

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मापदंड के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिले के मस्तूरी व तखतपुर ब्लॉक को रेड जोन में शामिल कर लिया है। दोनों ही ब्लॉक में कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बरतना शुरू कर दिया है।

मस्तूरी ब्लॉक में श्रमिकों के लिए 131 क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। जिले के तीन ब्लॉकों मस्तूरी,बिल्हा और तखतपुर से सबसे ज्यादा श्रमिकों ने पलायन किया है। क्वारंटाइन सेंटर को लेकर रणनीति बनाई जा रही है।

बीएस उइके-अपर कलेक्टर

Posted By: Nai Dunia News Network

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