धीरेंद्र सिन्हा, बिलासपुर। Bilaspur News: पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में चौकसी का अलग ही नजरिया है। सुरक्षा के नाम पर एक बड़े अधिकारी ने सीसीटीवी की संख्या 22 से बढ़ाकर 90 करने का फरमान जारी किया है। निश्चित रूप से सुरक्षा को लेकर यह एक बड़ा कदम है। मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर इधर-उधर तक तीसरी आंख की नजर होगी। कर्मचारी और अन्य अधिकारी इसे लेकर बेहद चिंतित हैं। कोरोना काल में आखिर ऐसी क्या बात आन पड़ी जो इतने सारे कैमरे से नजर रखी जाएगी। कौन सा सोने का हंडा रखा है कि चोर शिक्षा के मंदिर में घुसेंगे। दरसल तीसरी आंख से असामाजिक तत्व, चोर या संदिग्ध पर नजर नहीं बल्कि स्टाफ रडार पर होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि बड़े साहब को लगता है कि उनकी कुर्सी कभी भी खिसक सकती है। तभी तो कैमरे के साथ विभागों में एक-एक हरिराम नियुक्त किए हैं। वे उन्हें दिनभर की गोपनीय जानकारी देते रहते हैं।

झाड़ू लगाने पर मिलेगी 'डिग्री"

एक केंद्रीय संस्थान में पढ़ाई के साथ झाड़ू लगाने का नया पाठ्यक्रम शुरू हुआ है। कोरोना काल के चलते पहले बैच को सीधे प्रोन्न्त कर दिया गया। अब ऐसे में जिन्होंने इस कोर्स में प्रवेश लिया था उन्हें सैद्धांतिक और प्रायोगिक ज्ञान का कितना अनुभव हुआ है यह आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन, एक बात साफ है कि यह कोर्स देशभर में हिट हो चुका है। विडंबना यह कि इस कोर्स को स्वच्छ भारत अभियान के दायरे से बाहर रखा गया। केंद्र सरकार को अंधेरे में रखकर संचालित किया गया। पांच वर्ष का कोर्स पूरा करने वालों ने विश्वविद्यालय परिसर ही नहीं श्रमिक, सुरक्षा गार्ड और सफाईकर्मियों के वेतन में भी झाड़ू लगा दिया। एक कर्मचारी की मांग पर पुलिस विभाग अब डिग्री प्रदान करेगी। माना जा रहा है कि इस समारोह में संस्थान के पांच बड़े अधिकारी भी शिरकत करेंगे। दिल्ली से अब अंतिम अनुमति का इंतजार है।

डर के आगे जीत है

राज्य में 15 अप्रैल से कक्षा 10वीं बोर्ड की परीक्षा है। जिले से लगभग 32 हजार बच्चे इसमें शामिल होंगे। छात्र-छात्राएं अपने ही स्कूल में पर्चा हल करेंगे। कोरोना संक्रमण के बीच एक ओर माता-पिता चिंतित हैं वहीं शिक्षक बच्चों को डर के आगे जीत का पाठ पढ़ा रहे हैं। प्राचार्य स्कूल परिसर को सैनिटाइज करने के साथ पूरी तरह संक्रमण मुक्त बनाने हरसंभव प्रयास में जुट गए हैं। लेकिन, जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन की व्यवस्था हमेशा की तरह लचर है। नगर निगम को भी बच्चों के भविष्य को लेकर कोई सुध नहीं है। विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन के साथ उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार करने में हमारी व्यवस्था नाकाम लग रही है। शिक्षक चिंतित हैं यदि कोई संक्रमित मिला तो स्थिति भयावह होगी। सामाजिक संगठन भले ही अपनी ओर से बच्चों और शिक्षकों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन, शासन-प्रशासन को जरा भी चिंता नहीं है।

कैसी होगी अब परीक्षा पद्धति

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध संभाग के 199 महाविद्यालयों के दो लाख 10 हजार युवा प्रतिदिन परीक्षा विभाग से पूछ रहे हैं कि इस साल परीक्षा पद्धति कैसी रहेगी। घर से पर्चा हल करेंगे या सीधे प्रोन्न्त किए जाएंगे। या फिर कुछ नया होगा? 2020 में आनलाइन के नाम पर घर से लिखने का मौका मिला था। संकट की इस घड़ी में विद्यार्थियों ने खुद ही नया तरीका निकाला है। इस बार परीक्षा घर से नहीं बल्कि सीधे मोबाइल से ली जाए। केबीसी की तर्ज पर चार विकल्प के साथ सभी से 15 सवाल पूछे जाएं। तीन घंटे का पर्चा 30 मिनट में खत्म किया जाए। छात्रों को पांच लाइफलाइन दिए जाएं। परीक्षा विभाग के एक बड़े अधिकारी ने इस बात को दिल से लगा लिया। युवाओं को घर की बजाए अब मोबाइल पर नया खेल खेलने प्रोत्साहित भी कर दिया। चुपके से डिग्री पर नया पेंच फंसा दिया।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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