बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। 11 वें वेतन समझौते को जल्द लागू करने की मांग को लेकर एसईसी-प्रदर्शन में सुबह नौ बजे से ही बीएमएस, एचएमएस, इंटक, एटक और सीटू यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकत्रित हुए। उन्होंने सभी कर्मचारियों को काला फीता लगाने के बाद ही कार्यालय में प्रवेश करने दिया। इस प्रदर्शन में सभी कर्मचारियों ने स्वस्फूर्त शामिल होकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

भोजन अवकाश के समय 1:30 बजे एक बार फिर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष कर्मी एकत्रित हो कर मुख्यालय गेट पर नारेबाजी करने लगे। भारतीय मजदूर संघ के मुख्यालय संयोजक शंखध्वनि सिंह बनाफर ने बताया कि कोयला उद्योग के सभी मान्यता प्राप्त श्रम संगठनों ने 11वें वेतन समझौता में प्रबंधन और सरकार के द्वारा अनावश्यक विलंब करने के विरोध में संयुक्त रणनीति बनाकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया है।

इसके तहत जनवरी में रांची में संयुक्त कन्वेंशन का निर्णय लिया गया। इसमें आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। विरोध प्रदर्शन में बीएमएस से अनिल दिघ्रस्कर, गिरिजा शंकर आचार्य, अजय सिंह बनाफर, दिनेश पांडेय, संदीप बल्लाल, एचएमएस से प्रमोद राही, देवाशीष डे, अनीस सिंह, एटक के गजराज सिंह, विजय मुदलियार, सीटू से संदीप दास, इंटक से अनिल दूबे सहित बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

संगठन को केंद्रीय खान मंत्रालय के बीच विवाद की स्थिति

11वें वेतन समझौते को लेकर एसईसीएल के मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्रालय के बीच विवाद की स्थिति बनने लगी है। वेतनमान को लेकर मंत्रालय और संगठन के बीच किसी तरह का कोई समझौता फिलहाल नहीं हो रहा है। बीच का रास्ता भी नहीं निकल पा रहा है। इसके चलते विरोध की स्थिति बनी हुई है।

कर्मचारी संगठनों ने पहले ही इस बात की घोषणा कर दी है कि समझौता ना होने और समझौता वार्ता के लगातार विफल होने की स्थिति में देशव्यापी आंदोलन पर चले जाएंगे। अगर ऐसी स्थिति बनती है तो आने वाले दिनों में कोल खनन को लेकर संकट उठ खड़ा होगा। कोयला खनन और आपूर्ति को लेकर बीते महीने में जो स्थिति बनी थी, वैसा ही हाल एक बार फिर बनने की संभावना जताई जा रही है।

Posted By: Abrak Akrosh

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