Bilaspur News: बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ हरियर योजना के तहत वन विभाग ने बिलासपुर के मोपका में बैबू म्यूजियम बनाया है। इस बैम्बू म्यूजियम में 18 प्रजातियों के दो हजार पौधे रोपे गए हैं। जिसकी देखरेख करने वाला भी यहां कोई नही है। अब तो पार्क के अंदर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता हैं। मवेशी हरियाली को तबाह कर रहे हैं। इसके बाद भी विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

बांस के जंगल में खतरा मंडरा रहा है। इसमें प्रमुख प्रतिबंधित करील की बिक्री है। इसके अलावा वन विभाग और भी जगहों पर बांस के पौधे रोपने की योजना तैयार करा रहा है। जिले की यह पहली बांस रोपणी है जिसे म्यूजियम नाम दिया गया है। इसके पीछे तर्क है कि जिस तरह म्यूजियम में कुछ अलग तरह की चीजें नजर आती हैं और लोग उसे जानना चाहते हैं। इसी तरह बांस को लेकर भी यह जरूरी था। दरअसल बांस को हरा सोना भी कहा जाता है। वन विभाग ग्रामीणों को प्रेरित करता है कि खेत व निजी भूमि बांस का प्लांटेशन करें। इससे उनकी आर्थिक आय भी होगी। लेकिन यह पार्क अब अपनी बदहाली का रोना रो रहा है। पार्क को चारों ओर से फिनिशिंग तार से घेरा गया था। लेकिन अब यहां से तार गायब होने लगे है।

इसके अलावा असमाजिक तत्वों के द्वारा खंभे तक को तोड़ दिया गया है। जिसके चलते इस पार्क के अंदर आसानी से मवेशी घूस जाते हैं और हरियाली को नष्ट कर रहे हैं। यही नहीं अब यह पार्क नशेड़ियों ओर असमाजिक तत्वों का अड्डा बनते जा रहा है। लेकिन वन विभाग के जिम्मेदार अफसरों को इसे सहेज कर रखने की तक फुर्सत नहीं है। इतनी महत्वपूर्ण योजना के बाद भी अनदेखी का शिकार हो गई है। यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में जीवित बांस के पौधे भी सुरक्षित नहीं रहेंगे और असमाजिक तत्वाों के द्वारा इसे चोरी कर लिया जाएगा।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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