राधाकिशन शर्मा, बिलासपुर। Bilaspur News बिलासपुर जिले के नक्शे पर तीन औद्योगिक परिसर हैं। तिफरा,सिरगिट्टी और सिलपहरी। तीनों ही परिसर में 500 के करीब उद्योगों का संचालन किया जा रहा है। अलग-अलग उत्पादों की इन उद्योगों से प्रतिदिन एक करोड़ रुपये के प्रोडक्ट का उत्पादन होता है। राज्य निर्माण से पहले तीनों ही औद्योगिक परिसर आबाद रहा है।

30 साल में यह पहली बार है जब औद्योगिक क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। कारखानों की भीमकाय चिमनियां खामोशी की चादर ओढ़े खड़ी हुई हैं। चिमनियों की खामोशी अपनी बेबसी बयान कर रही हैं। दूर आसमान में उठता काला धुआं भी अब नजर नहीं आ रहा है।

चौतरफा शांति का माहौल है। निखालिस खामोशी के इस माहौल को दोपहिया और चारपहिया वाहनों की शोर तोड़ने की कोशिश भी करता है। कुछ देर के लिए शोर फिर गहरी खामोशी का चादर। लॉकडाउन के इस दौरान औद्योगिक परिसर की यही नियति है। खामोशी इस बात का गवाह है कि जल्द ही अच्छे दिन आएंगे। नया सबेरा होगा। फिर कल कारखानों की खामोशी टूटेगी और शोर-शराबा शुरू होगा। तभी तो नए जीवन की शुरुआत होगी ।

बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे में जब सफर हुई तो सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा। दूर तक न तो कोई वाहन आते दिखाई दिया और न ही पीछे से कोई वाहन तेज गति से जाते ओवरटेक करते। न आगे और न ही पीछे। सड़कों पर पसरा सन्नाटा लॉकडाउन की याद दिला रहा था। तिफरा कालीमंदिर के पास पुलिस का वाहन दिखाई दिया।

सफेद वर्दी पहने ट्रैफिक के जवान भी तैनात थे। गले में लटके पहचान पत्र को देखते ही आगे बढ़ने का इशारा कर दिया। कुछ दूर चलने के बाद बाईं तरफ हो लिए। तकरीबन डेढ़ किलोमीटर के सफर के बाद पहुंचे तिफरा इंडस्ट्रियल एरिया। औद्योगिक परिसर में पहुंचने के बाद इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि हम कारखानों की नगरी में पहुंच गए हैं। दूर आसमान की तरफ ताकने पर चिमनियां तो दिखी पर धुआं उगलने के बाद शांत चित्त । कारखानों की गगनचुंबी चिमनियां शांत खड़ी हुई थी। कारखाना के भीतर भी कोई शोर नहीं हो रहा था। कारखानों के मुख्यद्वार पर बड़ा सा ताला लटका मिला ।

मेनगेट से लगे वॉचरूम में जरूरी सुरक्षाकर्मी नजर आए। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की बातचीत से लगा कि ये लोग भी हैरान और परेशान हैं। भविष्य की बातों को लेकर चिंतित नजर आए। तिफरा में जो माहौल दिखा कमोबेश सिरगिट्टी में भी कुछ इसी अंदाज में सन्नाटा पसरा रहा।

सन्नाटा का आलम ये कि तब मोबाइल की घंटी बजी तो साफ-साफ सुनाई दे रही थी। यही वह कैम्पस है जहां कारखानों की बड़ी-बड़ी मशीनों की आवाज में लोग की तेज आवाज भी गुम हो जाया करती है। चारपहिया वाहनों की कानाफोड़ू हार्न भी सुनाई नहीं देती।

समय ऐसे बदला कि सेलफोन की घंटी सन्नाटा के बीच कान को रास नहीं आ रहा था। रोजाना एक करोड़ का नुकसान तिफरा और सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र में प्लास्टिक,फैब्रिकेशन के अलावा मैकेनिकल यूनिट है। सिलपहरी में स्टील बनाने वाली कारखाना है। इन कारखानों में प्रतिदिन एक करोड़ के प्रोडक्ट का उत्पादन होता है। 22 मार्च से कारखानों की चिमनियों ने धुआं उगलना बंद कर दिया है। कामकाज पूरी तरह ठप है। नुकसान का तो अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना