धीरेंद्र सिन्हा। बिलासपुर। Bilaspur News: मिठाई, हलवा, खीर, लड्डू, पाक और मेवे का स्वाद व शरीर में इम्युनिटी बढ़ाने वाली बहुउपयोगी चिरौंजी अब भारत ही नहीं, विश्व स्तर पर विलुप्ति की कगार पर है। केंद्र व राज्य सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाएगी। जंगल के भरोसे इसे छोड़ना घातक सिद्ध होगा।

ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में चिरौंजी पर शोध कर रहे वानिकी विभाग के कृषि विज्ञानी अजीत विलियम्स ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आइयूसीएन) ने इस पौधे को रेड डाटा बुक में शामिल कर लिया है। फिलहाल यह लो रिस्क लीस्ट कंसर्नड (कम जोखिम पर चिंताजनक) की श्रेणी में है।

चिरौंजी चार फल की गिरी होती है। विज्ञानी अजीत के शोध से पता चला है कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में वन विनाश के कारण इसकी प्रजाति तेजी से विलुप्त हो रही है। जागरूकता की कमी, गैर व्यावसायिक लघु वनोपज घोषित होने, जंगल की कटाई, आग लगने और कृषि भूमि विस्तार भी प्रमुख कारण हैं।

छत्तीसगढ़ में प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार टन इसकी आवक है। यह उत्तर, पश्चिमी और मध्य भारत के जंगलों में यानी मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के जंगलों में पाया जाता है। यह प्रजाति साल (शोरिया रोबस्टा) और टीक (टेक्टोना ग्रैंडिस) से निकटता से जुड़ी हुई है।

संरक्षण की दिशा में जरूरी कदम

विज्ञानी अजीत ने शोध के दौरान संरक्षण की दिशा में कुछ जरूरी उपाय सुझाए हैं। इनमें वैज्ञानिक तरीकों से फलों का संग्रहण,जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर रोक, कृषि भूमि के विस्तार पर रोक, कृत्रिम पुनरूत्पादन पर बल, प्रजाति को बचाने विशेष अभियान, सरकार द्वारा व्यापक कार्ययोजना और जननद्रव्य का संरक्षण शामिल है।

1400 रुपये किलो बाजार भाव

बिलासपुर के चिल्हर बाजार में चिरौंजी का भाव अभी 1400 रुपये किलो है। शोध में यह भी पता चला कि इसका व्यापार का क्षेत्र वृहद है। भारत के अलावा अरब देशों में बेहद मांग है। रोजगार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। जनवरी से मार्च तक इसमें फूल लगते हैं और अप्रैल-जून के महीने में फल पकते हैं।

चिरौंजी अब विलुप्ति की कगार पर है। छत्तीसगढ़ी चार को बचाने की जरूरत है। फल भले ही हल्का खट्टा और कसैला रहता है। लेकिन, यह पोषक तत्वों से भरपूर है। कोरोना काल में इम्युनिटी बढ़ाने का एक शानदार विकल्प है। संरक्षण की दिशा में शोध जारी है।

अजीत विलियम्स, कृषि विज्ञानी

ठा. छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविद्यालय व अनुसंधान केंद्र बिलासपुर

Posted By: Yogeshwar Sharma

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