राधाकिशन शर्मा, बिलासपुर Bilaspur News। कृषि रत्न पुरस्कार से सम्मानित किसान राघवेंद्र सिंह ने धान की 80 साल पुरानी सात किस्मों को आज भी सहेजकर रखा है। उनके आवेदन पर बीजों को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बीज खराब न हो इसके लिए वे हर वर्ष दो से तीन एकड़ में इनकी खेती भी करते हैं। धान की किस्मों में बौना विष्णु भोग, लुचई, बादशाह भोग, दुबराज, तुलसी मंजरी, रामजीरा व रानी काजर शामिल हैं। पुराने बीजों को संरक्षित रखने की खबर भारत सरकार के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण तक पहुंच गई है। बीते दिनों कृषि विज्ञानियों की टीम किसान राघवेंद्र के गांव रिस्दा पहुंची थी।

विज्ञानी सभी छह किस्मों का सैंपल अपने साथ ले गए हैं। राघवेंद्र सिंह ऐसे किसान हैं जिन्होंने उन्नत बीज तैयार करने के लिए न तो वैज्ञानिक सिद्घांतों की न पढ़ाई की है और न ही प्रयोगशाला में दिन-रात गुजारे हैं। मगर परिवार ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने धान के बीजों को संरक्षित रखा है। राघवेंद्र ने दादा और पिता के जमाने के धान के बीजों की शुद्घता को बचाए रखा है।

कृषि विज्ञानियों को इस बात की जानकारी तब मिली जब राघवेंद्र ने 80 साल पुरानी धान की सात किस्मों के बीजों को पेटेंट कराने के लिए जिनोम संरक्षण विभाग को पत्र लिखा। पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश पर बीते दिनों कृषि विज्ञानियों की टीम ग्राम रिस्दा पहुंची थी।

Posted By: Sandeep Chourey

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