बिलासपुर। Bilaspur News: एटीआर में घायल मिली बाघिन वास्तव में कहां की है इसकी पुष्टि के लिए मशक्कत शुरू हो गई है। अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बाघिन की तस्वीर को दिल्ली स्थित वन मंत्रालय के सेल नेशनल रिपाजिटरी आफ कैमरा ट्रैप फोटोग्राफी टाइगर (एनआरसीटीपीटी) को भेजा है। सेल के पास देशभर के बाघ व बाघिनों का रिकार्ड व उनकी तस्वीरें हैं। इसी से घायल बाघिन की फोटो का मिलान किया जाएगा। उम्मीद जताई गई है कि वहां सकारात्मक परिणाम आएगा।

अचानकमार टाइगर रिजर्व के छपरवा रेंज स्थित कल्हारपानी में घायल मिली बाघिन के उपचार को पहली प्राथमिकता दी गई। सुरक्षित रेस्क्यू कर कानन पेंडारी जू लाया गया और समय पर उपचार की सुविधा भी मिल गई। हालांकि पहले दिन इस बात को लेकर अटकलें थीं कि बाघिन अचानकमार टाइगर रिजर्व की है या कान्हा टाइगर रिजर्व या फिर बांधवगढ़ की। यह जानकारी होना अनिवार्य है कि बाघिन किस टाइगर रिजर्व की है। यह संकटग्रस्त प्रजाति है। इसे देखते हुए ही इसके संरक्षण के लिए भारत सरकार ने अलग से प्राधिकरण का गठन किया है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) केवल बाघों के संरक्षण पर काम करता है। देश के सारे टाइगर रिजर्व की कमान भी प्राधिकरण के पास ही है। उसके निर्देश पर ही टाइगर रिजर्व प्रबंधन साल में बाघों की गणना करता है। इसके अलावा चार साल में एक मुख्य गणना होती है। मसलन एक-एक बाघ का रिकार्ड रखा जा रहा है। इन्हीं सख्त नियमों का असर है कि अचानकमार प्रबंधन यह जानकारी जुटाने में गंभीरता दिखा रहा है कि यह बाघिन कहां की है।

हालांकि उन्होंने पहले अपने रिकार्ड खंगाले। गणना के दौरान जितने भी बाघ व बाघिन की तस्वीरें उनके पास हैं उनकी धारियों और घायल बाघिन के शरीर की धारियों का मिलान किया गया। पर उससे मेल नहीं खाया है। पर इस आकलन के आधार पर यह नहीं कह सकते कि बाघिन अचानकमार की नहीं है, क्योंकि गिनती ट्रैप कैमरे के आधार पर होती है।

अचानकमार प्रबंधन के पास इतने कैमरे नहीं हैं कि पूरे क्षेत्र में लगा सकें। ऐसा भी हो सकता है कि जहां कैमरे लगे हों उसके सामने से बाघिन कभी गुजरी ही न हो। वास्तविकता जानने के लिए ही एनआरसीटीपीटी को फोटो भेजी है। उनके पास देश के सभी बाघ व बाघिनों की तस्वीरें है। फोटो दोनों तरफ से ली गई है ताकि सेल के विशेषज्ञों को धारियों के आधार पर पहचान करने में दिक्कत न हो।

जहां की है वहीं छोड़ना होगा

अचानकमार टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर सत्यदेव शर्मा ने बताया कि दिल्ली से रिपोर्ट आने में दो दिन से लेकर सप्ताहभर तक का समय लग सकता है। रिपोर्ट के बाद पहचान हो जाएगी। जाहिर है कि यदि दूसरे जगह की बाघिन हुई तो उसे वहीं छोड़ा जाएगा।

स्वस्थ होने के बाद अपनानी पड़ेगी यह प्रक्रिया

घायल बाघिन के स्वस्थ होने के बाद उसे वापस जंगल में छोड़ा जाएगा। यही वजह है कि जितना हो सके मनुष्यों (वन अमले) से दूर रखा गया है। बाघिन को जंगल में छोड़ने के पहले भी कुछ जरूरी प्रक्रिया है उसे अपनानी पड़ती है। छोड़ने से पहले यहां प्राधिकरण को पत्र भेजा जाएगा। इसके बाद प्राधिकरण की टीम यहां पहुंचेगी।

वह यह आकलन करेगी की बाघिन जंगल में छोड़ने की स्थिति में है या नहीं। कुछ टाइगर रिजर्व में इस तरह के मामलों के लिए तीन से चार एकड़ का कंटीले तार से घिरा बाड़ा है, जहां पहले छोड़ा जाता है। उस बाड़े में चीतल, बकरी आदि जानवर भी छोड़े जाते हैं। यदि वह इनका शिकार कर लेते हैं तभी उसे जंगल में छोड़ने लायक माना जाता है।

पहले से हालत में सुधार

कानन पेंडारी जू में घायल बाघिन की हालत में सुधार हो रही है। गुरुवार को उसने आठ किलो चिकन खाया है। पर वह उठकर चल पाने में अभी सक्षम नहीं है। पीठ व पैर में जख्म के कारण दर्द है। जैसे-जैसे जख्म भरने लगेगा बाघिन स्वस्थ होने लगेगी।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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