बिलासपुर। नईदुनिया। Bilaspur News भाजपा शासनकाल में कागजी संस्था के नाम पर समाज कल्याण विभाग में हुए एक हजार करोड़ स्र्पये के कथित घोटाले की सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। गुस्र्वार को पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें घपले की सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए थे। इस मामले में याचिकाकर्ता ने सात आईएएस व पांच राज्य सेवा संवर्ग के अफसरों पर आरोप लगाया था। हालांकि सीबीआई ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

बता दें कि समाज कल्याण विभाग के संविदा कर्मचारी कुंदन सिंह ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर समाज कल्याण विभाग में फर्जी एनजीओ बनाकर एक हजार करोड़ स्र्पये हड़पने का आरोप लगाया था। इसमें उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम से हासिल दस्तावेज भी लगाए हैं।

राज्य निक्तजन स्रोत संस्थान के नाम पर प्रदेश के सात आईएएस व पांच राज्य सेवा संवर्ग के अधिकारियों की सूची पेश कर फर्जीवाड़ा में संलिप्तता होने की बात कही थी। हाई कोर्ट के जस्टिस प्रशांत मिश्रा व जस्टिस पीपी साहू की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद 30 जनवरी को दोषी अफसरों के खिलाफ सात दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने और समाज कल्याण विभाग से समस्त दस्तावेज जब्त करने के निर्देश सीबीआई को दिए थे।

चीफ जस्टिस ने गठित की थी स्पेशल बेंच

डिवीजन बेंच के फैसले के खिलाफ पूर्व आईएएस बीएल अग्रवाल व राज्य सेवा संवर्ग के अकिारी सतीश पांडेय ने चीफ जस्टिस के कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर किया था। चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन ने स्पेशल बेंच का गठन करते हुए जस्टिस प्रशांत मिश्रा व जस्टिस पीपी साहू को सुनवाई के निर्देश दिए थे। दोनों रिव्यू पिटीशन की सुनवाई के बाद स्पेशल बेंच ने खारिज कर दिया था । यही नहीं शासन की रिव्यू पिटीशन भी खारिज कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे याचिका

याचिकाकर्ता कुंदन सिंह के वकील देवर्षि ठाकुर ने पूर्व मुख्य सचिव की ढांढ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब नए सिरे से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही है। वकील ने कहा कि जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

Posted By: Hemant Upadhyay

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