बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। धरना प्रदर्शन के बहाने भाजपाई रणनीतिकार मैदानी कार्यकर्ताओं को घर से बाहर निकालने में काफी हद तक सफल होते नजर आ रहे हैं। राजधानी रायपुर में बेरोजगारी के मुद्दे पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के बैनर तले जिस तरह भीड़ इकठ्ठी हुई इसे देखकर दिग्गज भी अचरज में पड़ गए थे। 12 नवंबर को बिलासपुर में महतारी हुंकार रैली में महिलाओं की उमड़ी भीड़ के बाद अब यह तय हो गया है कि कार्यकर्ता चुनावी मोड में आने लगे हैं।

कार्यकर्ता चुनाव के लिए अपने आपको तैयार करने लगे हैं। यह दिग्गजों के लिए अच्छा संदेश है। कार्यकर्ताओं के उत्साह और मनोभाव को बनाए रखने के लिए अब मुद्दे बाहर निकाले जा रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में से एक प्रधानमंत्री आवास योजना के मुद्दे पर एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति को गरमाने का कोशिश की जा रही है। जाहिर है कार्यकर्ताओं की भीड़ एक बार फिर सड़क पर नजर आएगी। इस बार यह राजनीतिक शो दुर्ग में होगा।

वर्ष 2018 के बाद छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे ज्यादा बुरा हाल है। केंद्र व राज्य शासन के बीच राजनीतिक तल्खी के कारण गरीबों को अपना आशियाना नहीं मिल पा रहा है। केंद्र व राज्य के बीच उभरी राजनीतिक कटुता ने गरीबों का सपना चूर कर दिया है। पूर्व में जिन हितग्राहियों को आवास की सूची में शामिल किया गया है, उनको आज तक आवास की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

वर्ष 2018 के पहले जिन हितग्राहियों ने आवास बनाना शुरू किया था, राशि के अभाव में पूरा नहीं हो पाया है। आवास जीर्ण शीर्ण हालत में पहुंच गया है। गरीबों के मन में गुस्सा तो है पर प्रतिकार करने की स्थिति में नहीं है। सरकार के प्रति नाराजगी भी है। भाजपाई रणनीतिकारों ने गुस्से व नाराजगी को राजनीतिक रूप से कैश कराने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के मुद्दे पर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करने और गरीब विरोधी की छवि बनाने की कोशिश भी होगी।

पूरे आंदोलन को चरणबद्ध चलाया जाएगा। आंदोलन की शुरुआत ग्राम स्तर पर होगी। इस दौरान आवास योजना के हितग्राहियों को सीधे तौर पर जोड़ेंगे। उनसे बात करेंगे। केंद्र की योजना की जानकारी देंगे। राज्य द्वारा अटकाए जा रहे रोड़े को लेकर खुलकर बात करेंगे। ग्राम स्तर पर आंदोलन के दौरान एक-एक हितग्राहियों से व्यक्तिगत मुलाकात भी करेंगे।

मंडल स्तर पर दिखाएंगे ताकत

ग्राम स्तर पर हितग्राहियों को जोड़ने और ग्रामीणों के बीच अपनी बात रखने के बाद मंडल स्तर पर बड़ा आयोजन किया जाएगा। इसके लिए अभी से सूची बनाई जा रही है। प्रत्येक गांव के पीएम आवास योजना के हितग्राहियों को मंडल स्तर पर होने वाले आंदोलन में शामिल होने आग्रह करेंगे। मंडल के अंतर्गत आने वाले एक-एक गांव के एक-एक हितग्राहियों की उपस्थिति भी तय करेंगे। मंडल स्तर पर बड़ा राजनीतिक शो करने के बाद जिला मुख्यालयों में राज्य सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेंगे। प्रदेशभर के जिला मुख्यालय में माहौल बनाने के बाद 20 जनवरी को दुर्ग में प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा।

राज्य शासन ने ऐसे की पीएम आवास में कटौती

वर्ष 2019-20 में केंद्र सरकार ने एक लाख 51 हजार 10 आवास स्वीकृत किए थे। इसमें 100 आवास की कटौती कर दी गई। वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार ने छह लाख 48 हजार 867 आवास स्वीकृत किए थे। राज्य सरकार ने एक लाख 56 हजार 988 आवास को ही मंजूरी दी। चार लाख 91 हजार 879 आवास में कटौती कर दी। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2019-20,20-21 मेंे केंद्र सरकार ने सात लाख 99 हजार 969 आवास गरीबों के लिए स्वीकृत किया था। इसमें राज्य सरकार ने तीन लाख आठ हजार 79 आवास बनाने की बात कहते हुए शेष आवास को सरेंडर कर दिया। राज्य सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के आठ लाख 59 हजार 578 गरीब प्रतीक्षा सूची में खड़े हैं।

Posted By: Abrak Akrosh

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