Bilaspur Suresh Pandey Column: सुरेश पांडेय, बिलासपुर नईदुनिया। 22 सितंबर को पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का जन्मदिन है। समर्थकों, सिपहसालारों और कार्यकर्ताओं ने इस बार जन्मदिन को यादगार बनाने की तैयारी अभी से ही शुरू कर दी है। इस बार भैया का बर्थडे बहुत कुछ खास होगा। निगम के हर एक वार्ड में केक भी कटेगा और मोहल्लों में मिठाई भी बंटेगी। बीते साल कोरोना संक्रमण के कारण भैया ने ही जन्मदिन मनाने की मनाही कर दी थी।

खास लोगों को पहले से ही इशारा हो गया था। लिहाजा तैयारी भी नहीं की गई। संक्रमण के दौर में परिस्थिति भी ठीक नहीं थी। अब अच्छे दिनाें की शुरुआत हो रही है। शहर में इसका असर भी तो दिख रहा है। बारिश के दिनों में भैया वार्ड-वार्ड पहुंचकर पसीना बहा रहे हैं। कार्यकर्ता रिचार्ज भी हो रहे हैं। बर्थडे ही पैमाना रहेगा। कितना रिचार्ज हुए। यही वजह है कि इस दिन का भी बेसब्री से इंतजार हो रहा है।

वायरोलाजी लैब बंद कौन जिम्मेदार: पीएम के जन्मदिन पर देश में टीकाकरण का कीर्तिमान बना। या यूं कहें कि स्वास्थ्य विभाग के अमले ने संकल्प लिया और उसे पूरा करके दिखाया भी। कीर्तिमान के बीच देशभर के भाजपाइयों ने देशवासियों को बधाइयां दी। स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी इसकी जमकर सराहना की। इंटरनेट मीडिया में जमकर प्रचार प्रसार किया गया।

आत्ममुग्ध हो रहे भाजपाई इस बात से अनजान बने हुए हैं कि जिले की एकमात्र वायरोलाजी लैब बंद होने की कगार पर है। दरअसल, लैब संविदा कर्मचारियों के भरोसे संचालित है। इन कर्मियों की सेवा अवधि पूरी हो गई है। इनमें दर्जन भर कर्मचारी बैठ गए हैं। लिहाजा, अब अव्यवस्था का आलम है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिरकार कर्मचारियों के बिना लैब कैसे चलेगी। कर्मियों के अभाव में जांच प्रभावित हो रही है। बड़ी संख्या में सैंपल लंबित हैं। तीसरी लहर आई तो महामारी से निपटना तो दूर जांच भी मुश्किल हो जाएगी।

कैमरा लगाने यह कैसा अभियान: तत्कालीन आइजी ने शहर की सुरक्षा के लिहाज से मिशन सिक्योर सिटी अभियान की शुस्र्आत की थी। इसका मकसद यह था कि शहर के चौक-चौराहों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। ताकि, कभी भी शहर के भीतर गंभीर वारदात होने पर अपराधियों की पहचान कर आसानी से धरपकड़ की जा सके। उनके निर्देश पर पुलिस ने सक्रियता दिखाई और सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए अभियान चलाया।

इसकी आड़ में पुलिस अफसरों ने अपने संस्थान व थानों में भी कैमरे लगा लिए। हद तो अब हो गई है। जिले के डीएसपी साहब को अपने घर की सुरक्षा की चिंता सताने लगी और उन्होंने सीसीटीवी कैमरे लगाने का जुगाड़ शुरू कर दिया। उन्होंने इसके लिए अपने ही मातहतों को फरमान जारी कर दिया। डीएसपी का आदेश सर आंखों पर। बेचारे पुलिसकर्मियों ने अपनी नौकरी दांव में लगाकर किसी तरह बकरा हलाल किया और उनके निवास में सीसीटीवी कैमरे लगवाए।

कप्तान का बाउंसर, अफसर क्लीन-बोल्ड: क्रिकेट का मैच हो और सट्टेबाज सक्रिय न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। इसमें भी आइपीएल। सट्टेबाजों के लिए यह तो सोने पर सुहागा जैसा है। इसका अहसास पुलिस अफसरों को अच्छी तरह है। शहर में सट्टेबाजी हो और पुलिस को पता न चले, ऐसा हो ही नहीं सकता। अंपायर भी यही हैं और खिलाड़ी भी। लिहाजा, आइपीएल मैच के सट्टेबाजों पर इनकी फिल्डिंग जबरदस्त रहती है।

तभी सटोरिए व खाईवाल भी इनके आगे नतमस्तक रहते हैं। इस बार भी उनका आफर लेकर एक पुलिस अफसर कप्तान के दरबार में हाजिर हो गए। अफसर ने पुरानी परंपरा से अवगत कराया। साहब को माजरा समझ में आ गया। उन्होंने बिना किसी लाग लपेट के आफर ठुकराते हुए आइपीएल में सट्टे की कार्रवाई का टास्क थमा दिया। बेचारे पुलिस अफसर को तो साहब से ऐसी उम्मीद नहीं थी। अब उन्होंने बेमन से आइपीएल में कार्रवाई का फरमान जारी कर दिया है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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