बिलासपुर। Blood Banks in Bilaspur: सिम्स व जिला अस्पताल के सरकारी ब्लड बैंक में इन दिनों निगेटिव ब्लड ग्रुप का टोटा हो गया है। ए से ओ निगेटिव की मात्र कुछ यूनिट ब्लड बचा हुआ है। इसे वीआइपी के लिए आरक्षित रखा गया है। ऐसे में सामान्य मरीजों को निगेटिव ब्लड के लिए निजी ब्लड बैंक का चक्कर काटना पड़ रहा है।

जब से कोरोना काल शुरू हुआ तब से रक्तदान में कमी आ गई है, लोग रक्तदान से कतरा रहे हैं। यब स्थिति अभी तक बनी हुई है, ऐसे में यदि किसी मरीज को ब्लड चाहिए तो उसके स्वजन को ही ब्लड देना पड़ रहा है, या फिर ब्लड बैंक का चक्कर काटना पड़ रहा है। वहीं पिछले कुछ दिनों से सिम्स और जिला अस्पताल ब्लड बैंक में निगेटिव ग्रुप के ब्लड की कमी हो चली है। सिम्स में ए नेगिटिव की दो यूनिट है।

इसके अलावा कोई भी निगेटिव ग्रुप का ब्लड नहीं जिला अस्पताल में ओ निगेटिव की तीन यूनिट है। ऐसे में इस ब्लड को सामान्य मरीज को नहीं दिया जा रहा है। इसे वीआइपी के लिए रखा गया है। वही दूसरे मरीजों को साफ बोला जा रहा है कि वे खुद ही ब्लड लाए, तभी मरीज को ब्लड चढ़ेगा। ऐसे में ब्लड के आवश्यकता वाले मरीजो को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

खून दलाल हैं सक्रिय

सिम्स व जिला अस्पताल में हर दिन कम से कम 100 यूनिट ब्लड की खपत होती है। निगेटिव ग्रुप नहीं होने से खून दलाल सक्रिय हो गए हैं, जो मौके का फायदा उठाकर खून की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। एक यूनिट ब्लड चार से पांच हजार तक में बेचा जा रहा है। जिन पर किसी का लगाम नहीं है। प्रबंधन भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिस खून दलाली के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं।

Posted By: sandeep.yadav

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