बिलासपुर। Bilaspur News: सिम्स में हड्डी से संबंधित सर्जरी के दौरान काम आने वाले सी-आर्म मशीन बीते तीन सालों से खराब पड़ी हुई है, लेकिन इसे सुधरवाया नहीं जा रहा है। न ही इसकी जगह नई मशीन लगाई जा रही है। इससे सर्जरी वाले मरीज उपचार से वंचित हो रहे हैं। ऐसे में ज्यादातर मरीजों को रायपुर रेफर किया जा रहा है। वहीं आधे को निजी अस्पताल में सर्जरी कराने को बाध्य होना पड़ रहा है।

सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) की आर्थोपेडिक डिपार्टमेंट की चिकित्सकीय व्यवस्था बीते तीन साल से पटरी से उतरी हुई है। हड्डी की सर्जरी के लिए महत्वपूर्ण सी-आर्म मशीन की सुविधा सिम्स में नहीं है। तीन साल पहले यह मशीन बिगड़ गई थी। इसके बाद इसे बनाने की जहमत तक नहीं की गई है। जबकि सिम्स संभाग का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। ऐसे में यहां हड्डी रोग के मरीज बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। लेकिन, सर्जरी सुविधा न मिल पाने से उनका उपचार प्रभावित हो रहा है।

इसी तरह छत्तीसगढ़ सीमा से लगे मध्य प्रदेश के आसपास क्षेत्र में दुर्घटना से घायल मरीजों को भी सिम्स ही लाया जाता है। यहां इन्हें उनका प्राथमिक उपचार बस मिलता है। सर्जरी की स्थिति मंे चिकित्सक सी-आर्म मशीन न होने की बात कहकर हाथ खड़े कर देते हंै। इसके चलते मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद भी इस महत्वपूर्ण चिकित्सकीय मशीन को बनवाया नहीं जा रहा है।

ऐसे काम में आती है मशीन

सी-आर्म मशीन एक टीवी की तरह होती है। हड्डियों की सर्जरी के दौरान सर्जरी की प्रक्रिया इसकी स्क्रीन पर नजर आती है। इससे डाक्टरों को यह पता चलता है कि हड्डी के कितने अंदर तक ड्रील करनी है। साथ ही इसकी मदद से हड्डी की सही स्थिति देखी जाती है। इसके खराब होने की वजह से मरीजों को सिम्स में बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है।

जल्द खरीदी जाएंगी मशीनें

सिम्स के डिप्टी एमएस डा. विवेक शर्मा ने बताया कि मशीन काफी पुरानी हो चुकी है इसलिए सुधार के बजाए नई मशीन के लिए प्रस्ताव बना कर भेजा गया है। जल्द ही नई मशीन अस्पताल में आ जाएगी जिससे फिर से आर्थोपेडिक डिपार्टमेंट में सर्जरी शुरू कर दी जाएगी।

Posted By: sandeep.yadav

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