बिलासपुर। Chhattisgarh High Court News: विभिन्न समूहों व पक्षकारों के बीच विवादों को सुलझाने का एक सशक्त माध्यम मध्यस्थता ही रहा है। सफल मध्यस्थता से समाधान मिलता है, जिसमें कोई एक पक्ष की जीत नहीं होती। बल्कि दोनों पक्षों की जीत होती है। यही मध्यस्थता का सर्वोपरि सिद्धांत है। उक्त बातें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा ने हाई कोर्ट की मिडियेशन कमेटी द्वारा अपनी गतिविधियों से संबंधित पहले न्यूज लेटर का विमोचन करते हुए कहा।

हाई कोर्ट के कांफ्रेस हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यवाहक चीफ जस्टिस मिश्रा ने कहा कि इस तरह की कानूनी प्रक्रिया दोनों पक्षों के स्वार्थ निहित होती है। यह किसी विशिष्ट प्रकरण को नहीं हटाता, बल्कि विवाद को सुलझाने के लिए प्रोत्साहित करता है। जस्टिस पी सैम कोशी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पक्षकारों के बीच विवाद को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने की प्रक्रिया अभी अपने शैशव अवस्था में है।

यह एक ऐसा राज्य है जो कि मुख्य रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में है। इस स्थिति में ग्रामीण व अशिक्षित परिवेश में रहने वालों को विवाद सुलह की ऐसी विधि के बारे में जागरूक करने की आश्यकता है। इसमें मुख्य भूमिका विधिक समुदाय से जुड़े विशिष्ट रूप से प्रदेश के न्यायाधीशों और अधिवताओं की होती है। विवाद सुलह की प्रक्रिया का संदेश राज्य में प्रचारित किया जाना चाहिए।

इसमें न्यायालयों में विधि व्यवसाय करने वाले अधिवक्ताओं की मुख्य भूमिका कर्तव्य और जिम्मेदारी है कि मध्यस्थता के क्षेत्र में जागरूकता फैलाए। कार्यकम में जस्टिस आरसीएस सामंत ने कहा कि संवैधानिक प्रविधानों में इस बात पर बल दिया गया है कि प्रत्येक क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय का कर्तव्य है कि समझौता प्रकरणों को प्रोत्साहित करें और वैकल्पिक विवाद का समाधान मध्यस्थता प्रणाली को बनाएं।

उन्होंेने कहा कि प्रकाशित न्यूज लेटर में मध्यस्थता प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई है। साथ ही हाई कोर्ट के मध्यस्थता केंद्र द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों का विवरण सम्मिलित करते हुए प्रकाशन किया गया है। इसमें प्रदेश के 23 जिला न्यायालयों में मध्यस्थता केंद्र की जानकारी भी दी गई है।

मध्यस्थता प्रशिक्षण एवं मध्यस्थता के लिए आवेदन देने की प्रक्रिया के संबंध में भी इसमें जानकारी देते हुए मध्यस्थता के लिए जारी रेफरल जजों के लिए जारी किए गए आवश्यक दिशा-निर्देश को भी समाहित किया गया है। इस समारोह में जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव, जस्टिस विमला सिंह कपूर सहित न्यायायिक अधिकारी भी मौजूद रहे।

एक हजार एक सौ 79 प्रकरणों का हुआ निराकरण: सचिव

मध्यस्थता केंद्र प्रभारी एवं निगरानी समिति के सचिव संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि एक जनवरी 2019 से 31 अक्टूबर 2020 तक की अवधि में हाई कोर्ट के मध्यस्स्थता केंद्र व जिला न्यायालयों में स्थित उच्च न्यायालय मध्यस्थता केन्द्र तथा जिला न्यायालयों में स्थित मध्यस्थता केंद्र द्वारा एक हजार एक सौ 79 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। इसके लिए राज्य भर में 214 न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को मध्यस्थता का 40 घंटे का प्रशिक्षण दिया गया है। हाई कोर्ट में 24 अधिवक्ता मीडिएटर के रूप में काम कर रहे हैं।

Posted By: Yogeshwar Sharma

NaiDunia Local
NaiDunia Local