बिलासपुर। Chhattisgarh High Court News: न्यायालयीन आदेश की अवहेलना का आरोप झेल रहे संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थान के दो आला अफसरों की मुसीबत बढ़ गई है। हाई कोर्ट ने उनके वकील के जवाब पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कोर्ट को गुमराह ना करें। सिविल सर्जन ने अनुशंसा कर दी है, तब बिल का भुगतान करने में क्यों विलंब किया जा रहा है। कोर्ट ने संचालक अवनीश शरण व उप संचालक मनीषा नाग को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

रायपुर निवासी ओमप्रकाश मानिकपुरी ने वकील प्रांजल शुक्ल, शान्तम अवस्थी व अनिकेत वर्मा के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि वे रायपुर आइटीआइ में संविदा प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। मां के इलाज के लिए उन्होंने आवेदन दिया था। उस पर विभाग ने तीन लाख 80 हजार रुपये का बिल स्वीकृत किया। यह राशि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा चिकित्सा परिचर्य नियम 2013 के तहत दी गई थी। बाद में जिस अस्पताल में इनका इलाज हुआ, उस अस्पताल प्रबंधन ने 15 लाख रुपये का रिवाइज बिल जारी कर दिया। इसे सिविल सर्जन ने परीक्षण के बाद अनुशंसित भी कर दिया।

इसके बाद भी विभाग ने बिल के एवज में राशि का भुगतान नहीं किया। मामले की सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण को नोटिस जारी कर याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर बिल का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। तय अवधि के बाद भी प्रकरण का निराकरण नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने संचालक अवनीश शरण व उप संचालक मनीषा नाग के खिलाफ न्यायालयीन अवमानना की याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई के दौरान संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थान के वकील ने कहा कि इस मामले में हमारी भूमिका बहुत सीमित है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश ना करें। सिविल सर्जन ने जब बिल भुगतान के लिए अनुशंसा कर दी है तब क्यों विलंब किया जा रहा है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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