Chhattisgarh High Court: राधाकिशन शर्मा.बिलासपुर(नईदुनिया)। दुष्कर्म के एक प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने अभियुक्तों की सहमति के बिना उनके रक्त का सैंपल लेकर डीएनए टेस्ट करा दिया। निचली अदालत ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर युवक को दुष्कर्म का दोषी माना और 20 वर्ष की सजा सुना दी। प्रकरण हाई कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने बिना अनुमति के सैंपल लेने की प्रक्रिया को दोषपूर्ण मानते हुए सजा रद कर दी। यह मामला राजनांदगांव का है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह फैसला न्याय दृष्टांत बन गया है।

युवक पर नाबालिग को भगा ले जाने व दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज किया गया था। जब उसकी गिरफ्तारी हुई तो वह जिस युवती को भगा ले गया था उसके साथ विवाहित जीवन में था। पत्नी बालिग हो चुकी थी और दोनों की एक बेटी भी थी। इसके बाद युवती के पिता व भाई भी नहीं चाहते थे कि युवक पर कोई कार्रवाई हो। हालांकि कानून को अपना काम करना था। युवक की गिरफ्तारी की गई।

पुलिस के पास और कोई सबूत नहीं था इसलिए पति पत्नी और बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया गया और इसी आधार कोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। प्रकरण हाई कोर्ट पहुंचा तो पत्नी व उसके पिता ने दलील दी कि उसे बताए बिना उसका डीएनए टेस्ट किया गया। अभियोजन पक्ष की दलील थी कि डीएनए रिपोर्ट से स्पष्ट है कि बेटी उन दोनों की है और वह तब गर्भ में आई जब युवती नाबालिग थी।

हाई कोर्ट ने राहुल बनाम दिल्ली राज्य और गृह मंत्रालय के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को न्याय दृष्टांत मानते हुए निचली अदालत के निर्णय को रद कर दिया। कोर्ट ने कहा डीएनए रिपोर्ट के आधार पर युवक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में कहा है कि अभियोजन को साक्ष्य प्रस्तुत कर अभिलेख में उपलब्ध सामग्री द्वारा यह स्थापित करना होगा कि डीएनए प्रोफाइल परीक्षण के लिए रक्त के नमूने के संग्रहण में समुचित तथा उपयुक्त कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।

ये है मामला

आठ अगस्त 2018 को पीड़िता के पिता रोमन लाल वर्मा ने राजनांदगांव के घुमका थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसमें बताया गया कि उसकी नाबालिग बेटी को तीन अगस्त 2018 को भगाकर ले गया है। पुलिस ने अपीलकर्ता के विरुद्ध धारा 363 और 366 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर किया था। 15 जनवरी 2020 को पीड़िता अपने पति व बच्चे के साथ घर वापस आई। 12 फरवरी 2020 को डीएनए जांच के लिए तीनों के रक्त के नमूने लिए गए। उसी दिन पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव के कार्यालय ने अपीलकर्ता, पीड़िता और उसकी बच्ची का डीएनए प्रोफाइलिंग परीक्षण के लिए स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (डीएनए यूनिट) रायपुर भेजा। 25 फरवरी को डीएनए रिपोर्ट में पुष्टि की गई कि अपीलकर्ता और पीड़िता अपनी बच्ची के जैविक पिता और माता हैं।

पिता ने कहा- नहीं थी सहमति

पीडिता के पिता ने अभियोजन पक्ष के तर्कों का समर्थन नहीं किया है। जिरह के दौरान कोर्ट के सामने अपने बयान में उन्होंने साफतौर पर इस बात का खंडन किया है कि उनकी बेटी और उसकी बच्ची के खून के नमूने उनकी मौजूदगी में नहीं लिए गए थे। पीड़िता ने अदालत के समक्ष अपने बयान में इस बात से इन्कार किया है कि उसके साथ कोई घटना हुई थी और यहां तक कि उसने यह भी कहा है कि उसने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है कि आरोपी-अपीलकर्ता ने उसका अपहरण किया और शादी के बहाने उसके साथ यौन संबंध बनाए। उसने इस बात से भी इन्कार किया है कि पुलिस ने उसके और उसकी बच्ची के रक्त का ऐसा कोई नमूना लिया है। पीड़िता अपने पति के साथ जीवन बिताने की इच्छा भी जताई है।

Posted By: Abrak Akrosh

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