बिलासपुर। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कलेक्टर व एसडीएम जांजगीर-चांपा को आदेश जारी कर कहा है कि एक महीने के भीतर प्रभावित भूविस्थापित किसानों को बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा देने संबंधी अवार्ड पारित करें व मुआवजा राशि का भुगतान करें। डिवीजन बेंच ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम सारागांव के किसान महादेव गोड़,सदानंद शर्मा,शिव कुमार तिवारी,युवराज सिंह व अन्य ने वकील सुशोभित सिंह व गोविंद देवांगन के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि बिलासपुर से रायगढ़ के बीच फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सड़क के लिए उनकी जमीन का भी अधिग्रहण किया गया है।

जमीन अधिग्रहण के बाद अधिकांश किसानों को बाजार मूल्य से अधिक चार गुना दर से मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है। बाद में बनाए गए मुआवजा प्रकरण में केंद्र सरकार के गाइड लाइन का उल्लंघन करते हुए मुआवजा राशि को दो गुना कर दिया है।

इससे उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कलेक्टर व एसडीएम जांजगीर-चांपा को नोटिस जारी कर केंद्र सरकार द्वारा तय गाइड लाइन के अनुसार बाजार दर से चार गुना मुआवजा राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए थे।

इसके लिए एक महीने की मोहलत भी दी थी। तय समय सीमा के बाद भी जब कलेक्टर व एसडीएम कार्यालय से मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया तब किसानों ने कलेक्टर व एसडीएम जांजगीर-चांपा द्वारा कोर्ट के आदेश का अवहेलना करने के आरोप में अवमानना याचिका दायर की।

सोमवार को अवमानना याचिका पर चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई । मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना किए जाने से नाराज चीफ जस्टिस ने दोनों आला अफसरों को जमकर फटकार लगाई। डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता किसानों को एक महीने के भीतर गाइड लाइन के अनुसार बाजार दर से अधिक चार गुना मुआवजा वितरण के लिए अवार्ड पारित करने और भुगतान के निर्देश दिए।

Posted By: Sandeep Chourey