बिलासपुर। कोचिंग डिपो से पहले आटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट स्थापित करने का आधे से ज्यादा काम हो गया। जल्द ही मंडल की ट्रेनों के कोच का बाहरी इससे साफ हो गया। इस स्वचालित से ट्रेनों की धुलाई के दौरान समय, पानी और मानव श्रम की बचत होगी। अभी कम से कम पांच से छह घंटे समय लगते हैं।

वाशिंग लाइन में अब महज दस मिनट में ही ट्रेनों की सफाई हो जाएगी। इस दौरान ट्रेनों की सफाई में खर्च होने वाले पानी की भी काफी बचत होगी। अभी एक कोच की धुलाई में औसतन एक हजार लीटर पानी खर्च होता है दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के पहले स्वचलित कोच वाशिंग प्लांट का कार्य शुरू कर लिया गया है। यह काम कुछ माह पहले ही प्रारंभ किया गया था।

हालांकि पिछले साल भी इसकी शुरुआत हुई पर अचानक विभागीय अड़चनों के कारण काम बंद हो गया। अभी तक यह काम कर्मचारी करते थे। इसकी वजह समय और अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ती थी। पर अब इन दोनों की बचत होगी। इन कर्मचारियों से रेलवे कोचिंग डिपो में दूसरा काम करा सकती है। प्लांट की एक और खासियत यह है कि इसके माध्यम से पानी को रिसाइकिल कर उपयोग में लिया जा सकता है। साथ ही इसमें सीसीटीवी भी लगाए जा रहे हैं, जो ट्रेन के कोचों पर निगरानी रखेगा।

मशीन में सेंसर भी लगा है, सेंसर इसके चलने का सही समय निर्धारित करता है। मशीन में बेलनाकार ब्रश, क्लीनिंग केमिकल की मदद से अधिकतम आठ किमी की रफ्तार से चल रही ट्रेन की सफाई की जा सकती है। बामुश्किल कुछ महीने के भीतर इस प्लांट से कोच की धुलाई का काम प्रारंभ हो जाएगा।

Posted By: sandeep.yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local