बिलासपुर। Bilaspur News: विभाग में बिना किसी सूचना के एक साल से अधिक समय तक गायब आरक्षक को विभागीय जांच के बाद एसपी ने बर्खास्त कर दिया है। इससे पहले उसे तीन बार नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर भी दिया गया था। एसपी प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि रितेश शर्मा के पिता के निधन होने पर उसे 13 जून 2011 को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। इस दौरान उसकी पदस्थापना रक्षित केंद्र में थी। आरक्षक रितेश का कार्य व्यवहार शुरूआत से ही ठीक नहीं था।

इस बीच 2 अगस्त 2017 को वह बिना किसी सूचना के रात्रि गणना के दौरान ड्यूटी से गायब मिला। दो माह तक गायब देखकर रक्षित निरीक्षक ने 13 अक्टूबर 2017 को उसे नोटिस जारी किया और उसके परिवार वालों को सूचना दी गई। फिर भी वह ड्यूटी पर वापस नहीं आया। इसके बाद फिर से 23 नवंबर 2017 व 18 जनवरी 2018 को उसे नोटिस भेजा दिया। इस बार वह अपने घर पर नहीं मिला। तब उसकी मां को नोटिस की जानकारी दी गई। इस तरह से बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी वह कार्य में उपस्थित नहीं हुआ।

बाद में आरक्षक रितेश शर्मा 18 अगस्त 2018 को उपस्थित हुआ। नव आरक्षक ने स्पष्टीकरण में खुद के स्वास्थ्य खराब होने व दादा-दादी के निधन होने के कारण पारिवारिक उलझन होने की जानकारी दी। इस तरह से आरक्षक तीन सौ 82 दिन ड्यूटी से गायब रहा। उसके जवाब से असंतुष्ट होने पर एसपी ने विभागीय जांच के आदेश दिए। डीएसपी हेडक्वाटर पीसी राय ने उसके खिलाफ जांच की।

इसमें आरक्षक को दोषी पाया गया और उचित समाधान कारक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। स्वास्थ्य खराब होने पर वह मेडिकल रिपोर्ट भी पेश नहीं किया था। लिहाजा, जांच में दोषी पाए जाने के बाद एसपी प्रशांत अग्रवाल ने उसे सेवा से पृथक कर दिया है।

Posted By: sandeep.yadav

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