बिलासपुर । Coronavirus Bilaspur Update : प्राइमरी और मीडिल स्कूल में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइयों के मानदेय से इस महीने 200 रुपये कटेगा। यह राशि कोरोना से लड़ाई लड़ने के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा की जाएगी। बुधवार को कुछ इस तरह का फरमान संचालक लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेशभर के जिला शिक्षाधिकारियों को जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि मई या फिर अगले महीने मिलने वाले मानदेय से राशि कटौती कर ली जाए।

जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय के आंकड़ों पर भरोसा करें तो जिले में कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिल रहा है। प्राइमरी और मीडिल स्कूल में दो लाख 37 हजार बच्चे हैं जिनको प्रतिदिन स्कूल में एमडीएम के तहत गरम भोजन कराया जाता है। इसके लिए पांच हजार 700 रसोइयों की नियुक्ति मानदेय के आधार पर की गई है।

अधिकांश स्कूलों में स्वयंसेवी संस्थाओं को मध्यान्ह भोजन का जिम्मा सौंपा गया है। स्वयंसेवी संस्थाओं को इसी शर्त पर काम दिया गया है कि उनके द्वारा भोजन बनाने के लिए नियुक्त किए जाने वाले रसोइयों को प्रति महीने 1200 रुपये मानदेय के रूप में भुगतान करना होगा। शासन स्तर पर रसोइयों के लिए मानदेय तय किया गया है।

संचालक लोक शिक्षण संचालनालय कार्यालय से जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय में पहुंचे फैक्स संदेश में कोरोना वायरस से प्रभावी तरीके से लड़ाई लड़ने और गरीब तबके के लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में रसोइयों के इस महीने या अगले महीने के मानदेय से प्रति रसोइया 200 रुपये काट लिया जाए। जिलेभर से राशि को एकत्रित करने के बाद इसे मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा कराने के निर्देश जारी किए हैं।

एक दिक्कत यह भी

आमतौर पर यह शिकायत रहती है कि मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइयों को दो या फिर तीन महीने में एक बार मानेदय का भुगतान किया जाता है। नियमित रूप से मानदेय की राशि भी नहीं मिलती है। ऐसी स्थिति में किस महीने के मानदेय से राशि की कटौती की जाएगी यह भी समझ से परे है।

कोरोना ने स्कूल की रसोई पर जड़ा ताला

कोरोना संक्रमण के कारण स्कूलें भी बंद हैं। बच्चे घरों में ही हैं। मध्यान्ह भोजन भी स्कूल में नहीं बन रहा है। शर्तों पर नजर डालें तो काम नहीं तो वेतन नहीं की शर्त पर रसोइयों को रखा जाता है। स्कूल बंद होने से एमडीएम नहीं बन रहा है। ऐसे में रसोइयों को मानदेय भी नहीं मिल रहा है। राज्य शासन ने प्राइमरी और मीडिल के बच्चों को उनके घरों में चावल व दाल देने के निर्देश कलेक्टर को जारी किए हैं। लिहाजा बच्चों को उनके घरों में ही चावल व दाल उपलब्ध कराया जा रहा है।

- संचालक लोक शिक्षण संचालनालय का पत्र प्राप्त हुआ है। जारी निर्देशों का पालन करने स्कूलों के प्रधान पाठकों से कहा गया है। राशि इकठ्ठी होने के बाद एकमुश्त मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा कराई जाएगी। - अशोक भार्गव, जिला शिक्षाधिकारी,बिलासपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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