बिलासपुर। बेटियों को लेकर समाज की सोच में अब बड़ा बदलाव आया है। गोद लेने की इच्छा जताने वाले नि:संतान दंपती भी अब बेटों से ज्यादा बेटियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले तीन साल में बिलासपुर में संचालित मातृछाया से 47 बच्चों को गोद लिया गया है। उनमें से 25 लड़कियां हैं। जबकि लड़कों की संख्या 22 है। मातृछाया में अभी पांच वर्ष तक के 26 बच्चे हैं।

नए आवेदनकर्ताओं में से भी अधिकांश ने बेटियों के लिए आवेदन किया है। खास यह कि अब विदेश से भी बच्चों को गोद लेने के लिए आवेदन मिल रहे हैं। तीन वर्षों में आठ बच्चे विदेश गए हैं। इनमें पांच लड़के व तीन लड़कियां शामिल हैं। कोरोना महामारी ने कई परिवार से एकलौते संतान को छीन लिया है। इससे वे अकेले पड़ गए हैं और बच्चों की जरूरत महसूस कर रहे हैं।

ऐसे माता-पिता का ध्यान मातृ छाया की ओर जा रहा है। बच्चे गोद लेने के लिए आनलाइन पंजीयन करवा रहे हैं। साल 2019 से पहले ज्यादातर आवेदन लड़कों के लिए आते हैं। वहीं, अब नि:संतान दंपती लड़कियों को भी महत्व दे रहे हैं। लिहाजा बीते तीन सालों में बेटी गोद लेने के लिए महिला एवं बाल विभाग के पास आनलाइन आवेदन अधिक आए।

पांच वर्ष के बच्चों को प्राथमिकता

नि:संतान माता पिता पांच वर्ष के बच्चों को प्राथमिकता देते हैंं। आनलाइन पंजीयन में 95 प्रतिशत छोटे बच्चों के लिए आवेदन किया गया है। मातृ छाया में छह से 15 साल के बच्चे भी हैं। इस बीच 12 से 15 साल के दो बच्चों को गोद लिया गया है।

शारीरिक रूप से कमजोर बच्चे जा रहे विदेश

मातृ छाया की उपाध्यक्ष लता गुप्ता ने बताया कि सिकलसेल पीड़ित, फेफड़े में छेद, कम सुनने वाले ज्यादातर बच्चों को विदेशी नागरिक गोद ले रहे हैं। वहां बेहतर इलाज कर बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं।

नि:संतान दंपती अब लड़कियों को भी गोद लेने के लिए पंजीयन करवा रहे हैं। शासन के नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की जाती है। मातृ छाया में अभी 26 बच्चे हैं।

पार्वती वर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी बिलासपुर

Posted By: Yogeshwar Sharma

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