बिलासपुर। बिलासपुर जिले में फ़सल परिवर्तन की चमकदार तस्वीर दिखाई दे रही है। बीते खरीफ फसल के दौरान जिले के तीन हजार 457 किसानों ने परम्परागत धान की खेती करने के बजाय दलहन तिलहन के अलावा फलों की खेती करना प्रारम्भ किया है। किसानों के बदलते सोच के कारण राज्य सरकार की योजना को बल मिलते दिखाई दे रहा है।

खीरफ का सीजन आते ही किसानों के आम लोगो के मन मे यही धारण रहती है कि खेतो में किसान धान की खेती करेंगे। इस बार यह धारणा बदली है। किसानों ने ही यह चमत्कार कर दिखाया है। कृषि विभाग के अफसरों व कृषि विज्ञानी किसानों द्वारा की जा रही फसल परिवर्तनबको लेकर उत्साही नजर आ रहे हैं। ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा आरकेएस तिवारी का कहना है कि फसल परिवर्तन से किसानों की आय बढ़ेगी। इसके अलावा खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।

इससे मिट्टी उपजाऊ बनेगी व उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। धान के बदले अन्य फसल लेने से किसान समृद्ध होंगे। कृषि विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो किसानों ने इस बार जिंक धान के अलावा दलहन व तिलहन की खेती पर ज्यादा जोर दिया है। जिले में रागी की खेती भी शुरू हो गई है।

किसानों को मिली प्रोत्साहन राशि

धान के अलावा अन्य फसल उगाने वाले जिले के तीन हजार 457 किसानों को 1 करोड़ 86 लाख रूपये की प्रथम किश्त की सहायता राशि मुख्यमंत्री किसानों के खातों में जमा कराया है। सरकार की इस योजना से फसल परिवर्तन मुहिम को गति मिलने की संभावना देखी जा रही है।

00 धान बेचने वाले किसानों को मिली राशि समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले जिले के एक लाख 10 हजार किसानों के खातों में प्रथम किश्त के रूप में 72 करोड़ 62 लाख रूपये की राशि बीते दिनों जमा कराई गई है।

राज्य सरकार द्वारा राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत प्रति एकड़ 9 हजार रूपए के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दिया जाता है। जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में 4 लाख 84 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। इस पर 290 करोड़ रूपये की राशि प्रोत्साहन के रूप में किसानों को दी जाएगी।

66 हजार किसानों का हुआ था ऋण माफ

राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2018 में किए गए ऋण माफी योजना से 66 हजार से ज्यादा किसानों के लगभग 211 करोड़ रूपये की अल्पकालीन कृषि ऋण माफ किया है। यह राशि प्रोत्साहन के रूप में किसानों को दी जाएगी।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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