बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

बिलासपुर रेलवे पार्सल कार्यालय से उत्कल एक्सप्रेस में मेरठ के लिए 61 किलो गांजा बुकिंग का मामला तूल पकड़ लिया है। रेलवे मामले को लेकर बेहद गंभीर है। इसी के तहत गुरुवार सुबह से देर शाम तक पार्सल कर्मचारी से लेकर एजेंट से पूछताछ होती रही। उनका बयान भी दर्ज किया गया। इतना ही नहीं मुख्य पार्सल सुपरवाइजर (सीपीएस) को हटाकर पेंड्रा में पदस्थ कर दिया गया है। हालांकि रेलवे प्रशासन तबादले की वजह अन्य विभागीय कारणों को बता रहा है। जबकि हकीकत यही है कि बुधवार को मामला प्रकाश में आया और दूसरे दिन त्वरित कार्रवाई कर दी गई।

मेरठ में 15 लाख रुपये कीमती इस गांजा को जीआरपी ने पकड़ा है। इस मामले की छानबीन में पता चला कि इसकी बुकिंग बिलासपुर रेलवे पार्सल कार्यालय से कपड़े के नाम पर हुई थी। इसकी जानकारी मिलते ही यहां रेलवे में हड़कंप मच गया। बुधवार से आरपीएफ ने छानबीन में जुटी हुई है। गुरुवार को आरपीएस एएससी एके दास व डीसीएम किशोर निखारे सुबह 11 बजे पार्सल कार्यालय पहुंचे। उनके साथ आरपीएफ व रेलवे के अन्य कर्मचारी भी थे। अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि गांजा का पार्सल बिलासपुर से पहले राजधानी एक्सप्रेस में रायपुर से आया है। वहां से पार्सल पहुंचने के बाद बिलासपुर में पार्सल कार्यालय का नियमित ग्राहक चंद्रशेखर यादव ने इसकी बुकिंग की। उससे पूछताछ हुई तो उसने बताया कि यहां रायपुर से पार्सल में कपड़ा होने की बात कहकर बुकिंग करने के लिए भेजा गया था। इसी के मद्देनजर उसने इसकी बुकिंग की। पार्सल के सुपरवाइजर ने बुकिंग की उससे भी पूछताछ हुई। इसके अलावा अन्य कर्मचारियों को भी तलब कर अधिकारियों ने बयान दर्ज किया। यह बाद का मामला है। सुबह ही सीनियर डीसीएम पुलकित सिंघल ने एक आदेश जारी मुख्य पार्सल सुपरवाइजर आरएसएस यादव को हटाते हुए पेंड्रा में तबादला करने का आदेश जारी किया। साथ ही यह जिम्मेदारी राघवेंद्र पांडेय को दी गई है।

मेरठ में जिसके नाम से बुकिंग वह रिक्शा चालक

पता चला कि बिलासपुर में चंद्रशेखर यादव ने मेरठ निवासी सुशील नाम के जिस व्यक्ति के नाम पर बुकिंग की है। दरअसल वह रिक्शा चालक है। इससे साबित होता है कि गांजा को छिपाने के लिए आधे - अधूरे नाम का इस्तेमाल किया गया। लेकिन सुशील नाम का वह व्यक्ति पार्सल लेने के लिए नहीं पहुंचा और तीन से चार दिन गुजरने के बाद जब पार्सल को लेकर संदेह हुआ, तब वहां जीआरपी व आरपीएफ ने संयुक्त जांच की। इस दौरान इनमें कंबल लिपटे मिले। जब कंबलों को खोला गया तो उनके भीतर से गांजा बरामद हुआ।

व्यापारी का प्लेटफार्म परमिट रद

चंद्रशेखर यादव न तो पार्सल एजेंट है और न लीज होल्डर। वह पार्सल कार्यालय का नियमित ग्राहक है। वह हमेशा रेलवे के माध्यम से बुकिंग कर पार्सल भेजता है और उसके नाम से पार्सल यहां आता है। उसके इसी कार्य को देखते हुए रेलवे ने उसे प्लेटफार्म परमिट दी है। इसके तहत वह पार्सल जोनल स्टेशन में पार्सल की लोडिंग व अनलोडिंग कर सकता है। लेकिन गांजा का यह मामला सामने आने के बाद सीनियर डीसीएम ने तत्काल उसकी परमिट रद कर दी है। अब वह बिना अनुमति प्लेटफार्म से पार्सल लोडिंग व अनलोडिंग नहीं कर सकेगा।

ओडिशा से बस में रायपुर पहुंचा था गांजा

दूसरे दिन की जांच में एक अहम जानकारी हाथ लगी। दरअसल गांजा रायपुर से राजधानी एक्सप्रेस में बिलासपुर के लिए चढ़ाया गया। वहां जिस एजेंट ने बुकिंग की थी। उसे जांच टीम ने गुरुवार को पार्सल कार्यालय तलब किया और उससे पूछताछ की। उसने यह बताया कि पार्सल बस के जरिए ओडिशा से रायपुर पहुंचा था। उसे भी पुराने कपड़े होने की बात कहते बुकिंग करने के लिए कहा गया था।

सक्रिय है गांजा तस्कर

ट्रेन से गांजा भेजने के इस मामले से यह तो स्पष्ट है कि बड़े पैमाने पर ट्रेनों से गांजे की तस्करी हो रही है। साथ ही पूरी चालाकी के साथ तस्करी की इस घटना को अंजाम दी जा रही है। तस्करों ने सोची समझी योजना के तहत पहले बस फिर से ट्रेन का इस्तेमाल किया। यह बात भी सामने आ रही है कि जानबूझकर उत्कल एक्सप्रेस में इसकी बुकिंग कराई गई। दरअसल इस ट्रेन का मेरठ में पर्याप्त समय तक स्टापेज है। वहां इसे आसानी से उतारा जा सकता था। वह चाहता तो छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से सीधे रायपुर से ही गांजा रखे पार्सल की बुकिंग कर सकता था।

Posted By: Nai Dunia News Network