बिलासपुर। आज अपरा एकादशी है। भगवान विष्णु और लक्ष्मी के भक्तों पर 26 मई को विशेष कृपा बरसेगी। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का सभी को खास इंतजार रहता है। इसे अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों की हर मनोकामनाएं पूरी होती। जीवन में उन्हें कभी कष्टों का सामना नहीं करना पड़ता।

कथावाचक पंडित वीरेंद्र दुबे के मुताबिक अपरा एकादशी पर विष्णु भगवान और लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना का महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु पूरा दिन व्रत रखकर शाम के समय भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे उन्हें मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अपनी गलतियों की क्षमा प्रार्थना के लिए अपरा एकादशी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से साधक और व्रती को भगवान विष्णु की कृपा अवश्य मिलती है। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की कृपा बरसती है। साधक का पारिवारिक जीवन सुखमय बीतता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित डा.सत्यनारायण तिवारी के मुताबिक हिंदू पंचांग के अनुसार अपरा एकादशी को अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि व्रतियों को कुछ नियमों का पालन भी करना पड़ता है। इसमें प्रमुख है सूर्योदय से पहले उठें और अपने स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनकर विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए। पूर्व दिशा की तरफ एक पीढ़े पर पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को इसमें स्थापित करें। इसके बाद धूप दीप जलाएं और कलश स्थापित करें। भगवान को फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग अर्पित करें।

व्रती स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने दाएं हाथ में जल लेकर अपनी विपदाओं को समाप्त करने को प्रार्थना करें। निराहार रहकर शाम के समय अपरा एकादशी की व्रत कथा सुनें। व्रत खत्म होने के बाद फलाहार करें। शाम शुद्ध घी का दीपक जलाएं। विधिवत पूजा करने वाले भक्तों के जीवन में हमेशा खुशहाली बनी रहती है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close