बिलासपुर । Devshayani Ekadashi 2020 एक जुलाई को देवशयनी एकादशी ने भगवान का शयनकाल शुरू होगा। इसके साथ ही मांगलिक कार्य भी बंद हो जाएंगे। साथ ही चातुर्मास भी शुरू होगा और अधिकमास होने ने चातुर्मास की अवधि भी लंबी होगी। इससे मांगलिक कार्यों के लिए लंबा इंतजार करना होगा। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी को भगवान का शयनकाल पूर्ण होने से फिर से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

देवशयनी एकादशनी से भगवान का शयन काल शुरू होता है। पुराणों के अनुसार यह भगवान विष्णु का शयन काल होता है। वे चार मास के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं। इस वजह से देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं।

चातुर्मास को एक यज्ञ की संज्ञा दी गई है। इन दिनों तपस्वी भ्रमण नहीं करते और वे एक ही स्थान में रहकर तप पूजन करते हैं। चातुर्मास की अवधि में मांगलिक कार्य भी वर्जित माने गए हैं। मान्यता है कि श्रीहरि के शयन में चले जाने से मांगलिक कार्यों में देवताओं का आशीष नहीं मिल पाता है।

श्रीराम नहीं करेंगे नगर भ्रमण, मंदिर परिसर में होगी डिंडी यात्रा

कोरोना वायरस के संक्र मण को देखते हुए इस बार देवशयनी एकादशी पर एक जुलाई को तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर से भगवान की डिंडी यात्रा नहीं निकलेगी। इस तरह उनका नगर भ्रमण नहीं हो पाएगा। हालांकि मंदिर परिसर में ही इसकी विधि पूरी कर औपचारिक रूप से डिंडी यात्रा कराई जाएगी।

देवशयनी एकादशी पर तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर से भगवान की डिंडी यात्रा निकलती है। इसमें भगवान श्रीराम शहर के सभी मंदिरों का भ्रमणकर वहां विराजित सभी भगवान से मेल-मुलाकात करने के बाद मंदिर आते हैं और फिर वे अपने शयन काल के लिए चले जाते हैं।

मंदिर समिति के सहसचिव संजीव बाटवे ने बताया कि श्रीराम मंदिर के पट अभी बंद हैं। समिति ने 30 जून तक इसे बंद रखने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में इसके अगले दिन निकलने वाली डिंडी यात्रा भी नहीं निकालने का फैसला किया गया है।

इस बार पुरुषोत्तम मास, दो महीने का रहेगा क्वांर

इस साल पुरुषोत्तम मास है। हिन्दू पंचाग के अनुसार यह वर्ष 12 नहीं बल्कि 13 महीने का है। अश्विन (क्वांर) अधिकमास के रूप में रहेगा। इसकी शुरुआत 18 सितंबर से होगी। अधिकमास की अवधि में यह महीना 60 दिनों का होगा। इसमें बीच की अवधि अधिकमास रहेगा। पहले 15 दिन अश्विन मास के रहेंगे। फिर एक महीने का अधिकमास शुरू होगा। इसके बाद अधिकमास की अवधि पूर्ण होने के बाद फिर 15 दिन अश्विन मास रहेगा। 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिक मास पड़ रहा है। वहीं 17 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत होगी और 31 अक्टूबर को पूर्णिमा के साथ ही अश्विन पूर्ण होगा और एक नवंबर से कार्तिक की शुरुआत होगी। इससे इस वर्ष पितृपक्ष के लगभग एक महीने के बाद नवरात्रि की शुरुआत होगी।

पांच माह का रहेगा चातुर्मास

चातुर्मास चार का नहीं पांच महीने का होगा। अधिकमास होने की वजह से इसकी अवधि चार माह और 25 दिन यानी लगभग पांच माह का हो रहा है। वहीं अश्विन(क्वांर) मास के मध्य की 30 दिनों की अवधि अधिकमास की होगी।

पितृपक्ष 17 सितंबर से

पितृपक्ष आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावश्या तक रहेगा। दो सितंबर से 17 सितंबर तक पिृतपक्ष की अवधि रहेगी। सामान्य वर्षों में पितृपक्ष के बाद नवरात्र की शुरुआत होती थी लेकिन, इस वर्ष पितृपक्ष के बाद अधिकमास रहेगा। इसकी समाप्ति के बाद नवरात्रि की शुरुआत 17 अक्टूबर से होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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