बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

ट्रेनों में पत्थरबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। इससे परेशान रेल सुरक्षा बल अब जागरूकता के लिए अभियान चला रहा है। इस दौरान ग्रामीणों को चेताया जा रहा है कि पत्थरबाजी दंडनीय अपराध है। इसे जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

पथराव रोकने के लिए रेल सुरक्षा बल पिछले कुछ दिनों से अभियान चला रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में अधिक फोकस किया जा रहा है। इनमें तीनों रेल मंडलों शामिल हैं। विशेष गश्त भी की जा रही है। रात्रिकालीन समय में चलने वाली ट्रेनों में अमला तैनात होकर निगरानी कर रहा है। मालूम हो कि पिछले कुछ महीने में आरपीएफ ने पत्थरबाजी के आठ मामले दर्ज किए हैं। इन घटनाओं में ट्रेनों एसी कोच के शीशे टूटे या फिर लोको के शीशे टूटे। इसके अलावा चोट भी आई। इनमें यात्री के अलावा लोको पायलट भी शामिल है। सूचना के बाद उनका तत्काल उपचार भी कराया गया। कुछ लोगों की पहचान होने पर रेलवे एक्ट की धारा 152 के तहत गिरफ्तार कर उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यह बात भी सामने आई कि कुछ जगहों पर इस तरह की घटनाएं स्कूली बच्चों द्वारा की गई। शायद उन्होंने ऐसा खेल-खेल में किया। इसलिए उनके परिजन को जाकर समझाइश दी गई। अब दोबार पत्थबाजी न हो इसके लिए ग्रामीणों को सचेत किया जा रहा है।

यहां हुईं पत्थबाजी की घटना

आठ जनवरी को रायगढ़-राबर्ट्सन के बीच उत्कल एक्सप्रेस, दो फरवरी को चांपा के पास हसदेव एक्सप्रेस, 13 फरवरी को अनूपपुर में कोल लोड मालगाड़ी, 16 फरवरी किरोड़ीमल नगर-भूपदेवपुर के मध्य दरभंगा-सिकंदराबाद एक्सप्रेस, 24 फरवरी को शहडोल-अंबिकापुर पैसेंजर में मनेंद्रगढ़ के पास, 24 मार्च को नैला स्टेशन के समीप मालगाड़ी में, पांच अप्रैल को नैला-चांपा के मध्य कुर्ला-हावड़ा एक्सप्रेस, 21 जून को सरोना-उरकुरा स्टेशनों के मध्य मालगाड़ी में पथराव की गई।

Posted By: Nai Dunia News Network