बिलासपुर। Bilaspur News: ये उन नौ महिलाओं की कहानी है, जिनके पास पांच महीने पहले कोई काम नहीं था। सुबह से लेकर शाम तक जिंदगी फांके में गुजर रही थी। घर के कामकाज के बाद पूरे समय खाली बैठना पड़ता था। अब काम का बोझ इतना कि समय निकालना मुश्किल हो रहा है। गोठानों में गोबर से उत्पाद बनाने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना में से एक स्वच्छ भारत मिशन से जुड़कर काम करने लगी हैं। काम का बोझ इतना कि अब इन सभी नौ महिलाओं को सुबह चार बजे उठना पड़ता है।

घर के कामकाज के साथ सात बजे गोठानों के लिए निकल पड़ती हैं। वहां काम करने के बाद कचरा संग्रहण के काम को अंजाम देती है। दोपहर ढाई बजे फिर गोठान पहुंचकर शाम पांच बजे तक काम करती रहती हैं। संघर्ष की यह कहानी है स्व-सहायता समूह की माधुरी, शिवकुमारी, जनकनंदिनी, माया धुरी, कांति धुरी, शांति धुरी, नीमा दास, रामेश्वरी धुरी और सती धुरी की। ये महिलाएं पहले मजदूरी के लिए भटकती थीं। अब खुशी है कि वे अपने घर में ही रहकर, सुविधाजनक समय पर कार्य कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। गोठान में इन महिलाओं की मेहनत और कार्य के प्रति लगन को देखकर नगर-निगम ने उन्हें स्वच्छता अभियान से जोड़कर अतिरिक्त आय का जरिया प्रदान कर दिया है। नगर निगम बिलासपुर क्षेत्र के अंतर्गत मोपका में नरवा-गरुवा-घुरवा-बाड़ी योजना के तहत शहरी गोठान संचालित किया जा रहा है। इस गोठान में गोधन न्याय योजना के तहत तीन महिला स्व-सहायता समूहों की 30 महिलाएं वर्मी खाद बना रही हैं। साथ ही गोबर से अन्य सामग्री का निर्मित कर रही हैं।

उन्हें वर्मी खाद की बिक्री से अब तक सवा लाख रुपये का लाभांश मिल चुका है। गोकाष्ठ व गोबर के अन्य उत्पाद की बिक्री कर भी वे लाभ अर्जित करती हैं। स्व-सहायता समूह की नौ महिलाओं को नगर-निगम ने निश्शुल्क ट्राइसिकल प्रदान की है। इनसे वे वार्ड क्रमांक 47 में घर-घर जाकर कचरा संग्रहण कर रही हैं। एक ट्राइसिकल से 150 घरों का कचरा संग्रहण किया जाता है। हर महिला एक किलोमीटर के दायरे में घूम-घूमकर घरों से कचरा इकठ्ठा कर रही है। नगर निगम द्वारा प्रत्येक महिला को इस कार्य के लिए छह हजार रुपये पारिश्रमिक दिया जा रहा है।

Posted By: sandeep.yadav

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