रायपुर। हाथियों से होने वाली जनहानि को रोकने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए वन विभाग को एक छात्र ने अनोखा सुझाव दिया है। उसका कहना है कि मधुमक्खियों की आवाज से हाथी डरते हैं। यदि हाथी प्रभावित गांवों या ट्रैक के आसपास मधुमक्खी पालन किया जाए तो इस समस्या का समाधान निकल सकता है। छत्तीसगढ़ में मधुमक्खी पालन कर हाथियों को रोकने का उपाय किया प्रारंभिक तौर पर शुरू भी किया गया है। फिलहाल इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

बलौदा बाजार जिले के ग्राम मनोहरा तहसील सिमगा के एक छात्र पवन कुमार वर्मा ने यह सुझाव 31 मई 2019 को रायपुर में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को दिया था। इस सुझाव को अमल में लाने का आश्वासन सरकार की ओर से दिया गया है। अब संभावना जताई जा रही है कि राज्य में इस तरह का व्यापक प्रयोग जल्द शुरू हो सकेगा।

सितंबर 2017 में आसाम में रेलवे ने इस विधि को अपनाया गया था। वहां ऐसा सिस्टम आर्टिफिशियल सिस्टम लगाया गया जिससे मधुमक्खियों की आवाज निकली है और हाथियों को रोका जा सकता है। असम में इस प्रयोग के जरिए हाथियों पर नियंत्रण पाया गया है। इसका फायदा यह है कि रेलवे ट्रैक के आसपास हाथी नहीं आते। मधुमक्खी की आवाज हाथियों को परेशान करती है। इसके अलावा ट्रेन से कटकर हाथियों के मौत की घटनाएं भी कम हुईं है।

छत्तीसगढ़ के करीब 10 जिले हाथियों से प्रभावित हैं। यहां हाथी बड़े दल बनाकर जंगलों में स्वच्छंद घूमते रहते हैं और गांवों तक भी पहुंच जाते हैं। यह यहां खेतों में फसलों को रौंधते हैं और आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि हाथी दल लोगों पर भी हमला करते हैं और आए दिन यहां हाथियों के हमले में लोगों की मौत होती रहती है। छत्तीसगढ़ में सरगुजा सबसे ज्यादा हाथी प्रभावित क्षेत्र है। यहां जनवरी 2017 में मधुमक्खी पालन की शुरुआत की गई। अभी भी यह योजना प्रयोग के तौर पर है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी आर्टिफिशियल साउंड सिस्टम की जगह मधुमक्खी पालन के जरिए हाथियों को रोकने के प्रयास पर ज्यादा विचार किया जा रहा है। सरगुजा में इस दिशा में किया गया प्रयोग प्रारंभिक स्तर पर बेहतर परिणाम दे रहा है, लेकिन इसे और व्यापक बनाना जरूरी है। हाथी नियंत्रण के इस काम के साथ ही राज्य में मधुमक्खी पालन के काम में भी तेजी आएगी। अभी इस दिशा में बड़ी योजना बनाने के लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है।

सुझाव मुख्यालय को भेजा

एक छात्र ने इस तरह का सुझाव दिया है। मैंने भी पहले इस विधि से हाथियों को नियंत्रित कर गांव में रोकने की बात सुनी है, लेकिन इसकी प्रेक्टिकल जानकारी मुझे भी नहीं है। सुझाव को वन मुख्यालय भेजा जाएगा। उधाधिकारियों के आदेश पर आगे की प्रक्रिया होगी- पीके केशर, सीसीएफ वाइल्ड लाइफ, बिलासपुर संभाग

Posted By: Nai Dunia News Network