बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। केंद्र समेत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में 20 वर्ष की सेवा होने पर वेतन के 50 प्रतिशत पूर्ण पेंशन का प्रविधान है। इसे छत्तीसगढ़ में लागू करवाने की मांग छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने की है। राज्य शासन से इस संबंध में पत्राचार किया जा रहा है।

शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, विकास राजपूत के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तराखंड सरकार के नियमपत्र का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग को 20 वर्ष की सेवा होने पर वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन निर्धारण के प्रविधान लागू करने की मांग की है। शिक्षक संजय शर्मा ने बताया कि एक जनवरी 1996 से प्रभावशील पुनरीक्षित वेतनमानों में प्राप्त वेतन के आधार पर पेंशन, पेंशन नियम 1976 में परिभाषित अनुसार 33 वर्ष की सेवा होने पर 50 प्रतिशत पेंशन निर्धारण का प्रविधान छत्तीसगढ़ राज्य में प्रचलित है।

कम सेवा होने पर अनुपातिक पेंशन निर्धारण का नियम है। भारत सरकार के लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय(पेंशन एवं पेंशन भोगी कल्याण विभाग नई दिल्ली) के पेंशन नियम के बिंदु 5(2) में प्रविधान किया गया है कि पूरी पेंशन के लिए 33 वर्षों की पात्र सेवा के संबंधों को समाप्त कर दिया जाएगा। एक बार सरकारी सेवक द्वारा 20 वर्षों की सेवा पूरी कर लेने के बाद पेंशन परिलब्धियों या पिछले 10 महीने के दौरान प्राप्त उपलब्धियों के औसत जो भी अधिक हो कि 50 प्रतिशत पेंशन दी जाएगी।

यूपी में वेतन का 50 प्रतिशत

उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश 16 सितंबर 2009 के पेंशन नियम 4(2) में प्रविधान है कि वर्तमान में पूर्ण पेंशन प्राप्त करने के लिए अधिकतम 33 वर्ष की अर्हकारी सेवा प्रदान करना अनिवार्य है। लेकिन व्यवस्था में संशोधित करते हुए तत्काल प्रभाव से यह व्यवस्था की जाती है कि पूर्ण पेंशन प्राप्त करने के लिए 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा करना अनिवार्य है। जो कर्मी 20 वर्ष की सेवा पूर्ण कर के सेवानिवृत्त होते हैं, उन्हें अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत पेंशन लागू है।

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