बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। रेडी टू ईट पोषण आहार का कार्य महिला स्व-सहायता समूह से राज्य सरकार द्वारा वापस लेने के मामले को सांसद अरुण साव ने लोकसभा में उठाते हुए कहा कि यह महिलाओं के साथ अन्याय है।

सांसद अरुण साव ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान राज्य सरकार की ओर से रेडी टू ईट पोषण आहार महिला स्व-सहायता समूह से छिनने के मामले को उठाया। सांसद साव ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार नारी शक्ति के सम्मान एवं सशक्तीकरण के लिए अभूतपूर्व काम कर रही है।

केंद्र सरकार की ओर से तीन तलाक का मामला, हर घर में शौचालय निर्माण, हर घर में मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने का काम, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 73 लाख महिला स्व-सहायता समूह से जुड़े हुए आठ करोड़ ग्रामीण महिलाओं को 4.32 लाख करोड़ का लोन देकर उन्हें सक्षम और आत्मनिर्भर बनाए का काम हो।

इस योजना के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। साथ ही परिवार के भरण पोषण में अपना योगदान दे रही हैं। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने 26 नवंबर 2021 को आदेश जारी कर 2009-10 से रेडी टू ईट पोषण आहार का कार्य कर रही 21 हजार से अधिक महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई महिलाओं से आजीविका छीनकर उन्हें कमजोर करने का काम किया जा रहा है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर संज्ञान लें, ताकि महिला सशक्तीकरण अभियान सतत चलता रहे और महिलाएं सक्षम और आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार के साथ-साथ राष्ट्र के विकास में योगदान कर सकें।

Posted By: anil.kurrey

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