बिलासपुर। बिल्हा विकासखंड के सेवा सहकारी समिति मार्या हरदीकला क्षेत्र के किसान का 29 हजार रुपये कर्ज माफ हो गया है। जबकि उसने कोई कर्ज नहीं लिया था। बैंक के दस्तावेज में भी कर्ज की बात दर्ज है। जबकि किसान का कहना है कि उन्होंने साल 2018-19 में किसी भी बैंक से केसीसी लोन नहीं लिया है। किसान को तीन साल बाद सूचना के अधिकार के तहत बैंक से लोन माफ होने की जानकारी मिली। तब उनके होश उड़ गए। किसान ने बैंक प्रबंधन व सेवा सहकारी समिति के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

बिल्हा क्षेत्र के हरदीकला टोना के रहने वाले मणिशंकर कौशिक किसान हैं। उन्होंने बताया कि साल 2018-19 में किसी भी बैंक से केसीसी लोन नहीं लिया था। विधानसभा चुनाव के बाद साल 30 नवंबर 2018 में किसान के नाम पर राज्य शासन ने ऋण माफ प्रमाण पत्र जारी किया। इसमें लिखा गया है कि मूल धन और ब्याज की संपूर्ण राशि की ऋण माफी स्वीकृति कर दी गई है। प्रमाण पत्र मिलने के बाद किसान के होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने सेवा सहकारी समिति मार्या हरदीकला संस्था में जाकर पूछताछ की। लेकिन अधिकारी ने कोई जानकारी नहीं दी। गोलमोल जवाब देकर किसान को वापस भेज दिया। वहां से किसान उप पंजीयक सहकारी संस्था बिलासपुर पहुंचे। वहां जानकारी मांगी गई, लेकिन नहीं मिली।

इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार लगाकार जानकारी मांगी। तब पता चला कि किसान मणिशंकर के नाम से 29 हजार रुपये केसीसी लोन निकाला गया है। रकम किसान के खाता में जमा नहीं हुआ है। पैसे नकद देने की बात कही गई है। बैंक रिकार्ड में स्पष्ट है कि उस दौरान किसान के बैंक खाता में लोन संबंधी रकम जमा नहीं हुआ है। अब किसान इसकी शिकायत पुलिस और बड़े अधिकारियों से करने की बात कह रहे हैं।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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