बिलासपुर। औद्योगिक न्यायालय के अध्यक्ष की नियुक्ति के मामले में अब 14 फरवरी को ही अंतिम सुनवाई होगी। हाई कोर्ट ने नियुक्ति आदेश पर पहले स्थगन दे दिया था। अग्रलाल जोशी के वकील ने इसे हटाने अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने मानने से इन्कार कर दिया था। हाई कोर्ट के नोटिस के बाद अब राज्य सरकार नियुक्ति के नियम को ही संशोधित कर रही है। नए प्रस्ताव के अनुसार अब सरकार अपनी मर्जी से अध्यक्ष की नियुक्ति करेगी। इसमें हाई कोर्ट के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।

इसी मामले में अधिवक्ता मलय जैन ने जनहित याचिका कर कहा था कि राज्य औद्योगिक न्यायालय के अध्यक्ष की नियुक्ति हाई कोर्ट की अनुशंसा प्राप्त कर की जाती है। यह नियुक्ति छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960 के अंतर्गत अनिवार्य है। पिछली सुनवाई के दौरान पता चला कि हाई कोर्ट से अध्यक्ष पद के लिए एक नाम की अनुशंसा की जा चुकी है। इस पद पर फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अग्रलाल जोशी को अगले पांच साल के लिए 65 वर्ष की आयु तक नियुक्त कर दी है।

इसका ही विरोध कर याचिकाकर्ता ने युगलपीठ में कार्यभार लेने पर स्थगन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। मामले में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस नियुक्ति पर रोक लगाते हुए कार्यभार ले चुके अध्यक्ष को भी किसी भी तरह के अधिकारिक कार्य करने से रोक दिया था। गत माह चीफ जस्टिस की युगलपीठ में अग्रलाल जोशी के वकील ने स्थगन को रिक्त करने का अनुरोध किया था। हाई कोर्ट ने इसे नामंजूर कर दिया था। मंगलवार को युगलपीठ में सुनवाई निर्धारित थी, जिसे हाई कोर्ट ने रोकते हुए अब सीधे 14 फरवरी को अंतिम सुनवाई रखी है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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