बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रेलवे पूछताछ केंद्र का नाम बदलकर 'सहयोग' कर दिया गया है। नाम बदलने के साथ ही अब रेलवे इसे निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में जोन मुख्यालय और यहां से तीनों रेल मंडल बिलासपुर, रायपुर व नागपुर के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधकों को पत्र लिखकर प्रस्ताव मांगा है।

इसमें उन्हें यह जानकारी देनी होगी कि उनके मंडल में कितने पूछताछ केंद्र हैं और वहां कितने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। कर्मचारियों की संख्या के आधार पर आकलन किया जाएगा कि यात्रियों को ट्रेनों की जानकारी देने के इस कार्य में कितने कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। निजीकरण के बाद यहां से रेलवे के कर्मचारी हट जाएंगे। हालांकि उपकरण यथावत रहेंगे।

रेलवे में निजीकरण नई बात नहीं है। स्टेशन व ट्रेनों में सफाई व बेडरोल सप्लाई का काम पहले ही ठेके पर दिया जा चुका है। अब बारी पूछताछ केंद्र की है। गोरखपुर समेत कुछ रेलवे यह कर चुकी है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन भी इस राह पर चल रहा है। इसलिए जानकारी मांगी गई है। मंडल स्तर पर रिपोर्ट भी बनने लगी है। जिसमें कर्मचारियों की संख्या और उनके नाम एवं पदनाम की जानकारी है।

इन कर्मचारियों को पूछताछ केंद्र से हटाने के बाद रेलवे इनसे दूसरे कार्यों में सेवाएं लेंगी। इससे रेलवे के अन्य कार्यों के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ जाएगी। एकाएक निजी हाथों में देने के बाद एक वजह शिकायत भी हो सकती है। दरअसल अक्सर यात्री यह शिकायत करते हैं की पूछताछ केंद्र में ड्यूटीरत कर्मचारी सही जानकारी नहीं देते हैं। इसके अलावा उनका व्यवहार भी सही नहीं रहता। रेलवे का मानना है कि यह काम निजी हाथों में जाने के बाद व्यवस्था उसी तरह सुधरेगी, जैसी सफाई में सुधरी है। हालांकि तीनों रेल मंडल ने अब तक रिपोर्ट नहीं भेजी है। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।

30 से अधिक पूछताछ केंद्र

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन में तीन मंडल बिलासपुर, रायपुर व नागपुर आते हैं। तीनों मंडलों में 30 से अधिक पूछताछ केंद्र हैं। हालांकि प्रयोग के तौर पर कुछ चुनिंदा केंद्रों को निजी हाथों में सौंपा जा सकता है।

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