बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जंगल में मवेशियों की घुसपैठ रोकने और छोटे-छोटे पौधों को नष्ट होने से बचाने के लिए वन विभाग ने बड़ी योजना तैयार की है। पुनर्उत्पादन सुरक्षा व प्रबंधन कार्य के तहत अब गांव से लगे पांच हेक्टेयर के दायरे में मवेशी चराई करेंगे। इसके अलावा 15 हेक्टेयर भूमि चिंहित कर वहां चारा उत्पादन किया जाएगा। इससे मवेशियों को अपने आसपास ही चारा मिल पाएगा।

रिजर्व फारेस्ट में इसे गौठान का एक विकल्प भी कहा जा सकता है। नियमानुसार रिजर्व फारेस्ट में कोई पक्का निर्माण कार्य नहीं हो सकता है। यही वजह है कि जंगल से करीब गांव में गौठान नहीं बन सका। अभी ग्रामीण मवेशियों को लेकर जंगल में घुसते हैं और जहां चाहे वहां चराई कराते हैं। इसका बड़ा नुकसान होता है। जंगल में पनपने वाले छोटे पौधे मवेशियों के पैरों में दबकर पेड़ नहीं बन पाते हैं। इसे विभागीय भाषा पुनर्उत्पादन को नुकसान कहा जाता है। विभाग द्वारा इसे रोकने के लिए काफी प्रयास किए जा रहे थे। मवेशी मालिकों को कई बार मना किया गया। कई जगहों पर कार्रवाई भी की गई। लेकिन स्थिति जस की तस है। ग्रामीण सीधे तौर पर यह कहते हैं कि मवेशियों के चराने के लिए कहां जाएंगे। इसे देखते हुए ही पुनर्उत्पादन सुरक्षा व प्रबंधन कार्य की योजना तैयार की गई। इसके तहत पांच हेक्टेयर क्षेत्र में सीपीटी बनाकर उसके अस्थाई शेड बनाए जाएंगे। विभाग का मानना है कि मवेशियों को इस दायरे में रोककर जंगल के बॉकी हिस्सों में पुनर्राउत्पादन का नुकसान होने से बचाया जा सकता है। इसके अलावा मवेशियों को चारे की दिक्कत भी नहीं आएगी, क्योंकि इसका विभाग पुख्ता इंतजाम करेगा। चिंहित जगहों में 15 हेक्टेयर एरिया में चारा प्रजाति की घास का उत्पादन किया जाएगा। यह कार्य मनरेगा के तहत होंगे।

10 से 12 शेड, सोलर पंप से बुझेगी प्यास

पांच हेक्टेयर एरिया में मवेशियों के लिए अस्थाई शेड बनाए जाएंगे, ताकि बारिश या धूप में उन्हें परेशानी न हो। इसके अलावा पानी के लिए सोलर पंप लगाए जाएंगे। चारा खिलाने के लिए पात्र बनाया जाएगा। इसके साथ ही पूरे एरिया में चारे को बिखेर देंगे। इससे मवेशी इधर-उधर नहीं जाएंगे।

वनमंडल में 18 गांव चिंहित

यह योजना सभी वनमंडल के लिए है। पहले चरण में कुछ गांवों को चिंहित किया गया। इसके तहत बिलासपुर वनमंडल में 18 जगहों पर मवेशियों के लिए चारागाह और चारा विकसित किया जाएगा। बिलासपुर रेंज की बात करें तो सोठी, जेवरा, खोंदरा, धौंरामुड़ा, लिम्हा को चिंहित किया गया है।

यह गौठान नहीं है। बल्कि जंगल में अनियंत्रित चराई को रोकने की कोशिश है। पुनर्उत्पादन सुरक्षा व प्रबंधन कार्य योजना के तहत पांच हेक्टेयर के एरिया को चिंहित किया जाएगा। जहां मवेशी रहेंगे। इनके लिए चारा का उत्पादन भी किया जाएगा। वनमंडल में 18 जगहों में यह व्यवस्था करने की योजना है।

सत्यदेव शर्मा

डीएफओ, बिलासपुर वनमंडल

Posted By: Nai Dunia News Network

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