बिलासपुर । कोयला संकट की वजह से पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग सेक्टर ( एमएसएमई) बुरी तरह प्रभावित हैं। प्रदेश में एक हजार लघु उद्योगों को केवल 20 फीसद व 500 मध्य उद्योगों को 50 फीसद भी कोयला उपलब्ध कराया जा रहा। इससे 15 हजार करोड़ का सालाना कारोबार प्रभावित हुआ है।

कोयले की कमी की बीच बिजली की निर्बाध आपूर्ति समस्या बनी हुई है। कोल इंडिया से संबद्ध कंपनियों में प्रतिदिन औसतन 18 लाख टन कोयले का उत्पादन हो रहा। वहीं देश भर के बिजली संयंत्रों में 18.5 लाख टन कोयला की खपत है। आपूर्ति 17.5 लाख टन किया जा रहा है। देश भर में करीब 20 फीसद बिजली की मांग बढ़ने से घरेलू कोयले की आपूर्ति नाकाफी साबित हो रही है। उत्पादन बढ़ाने के बाद भी बिजली संयंत्रों को मांग के अनुरूप कोयला उपलब्ध नहीं हो पा रहा। इसका सीधा असर गैर बिजली सेक्टरों पर पड़ा है। कोल इंडिया ने सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों के कोटे में कटौती कर दी है।

लघु व सहायक उद्योग संघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष हरीश केडिया का कहना है कि पिछले एक साल से कोयले की किल्लत राज्य के छोटे उद्योग झेल रहे हैं। अभी पिछले कुछ माह से केवल 20 फीसद कोयला ही हमें दिया जा रहा। इस वजह से उद्योगों को 50 फीसद उत्पादन घटाना पड़ा है। करीब 30 फीसद कोयला बाहर से मंहगे दर पर खरीदने की मजबूरी बनी हुई है। साल में लघु उद्योगों को जितनी कोयले की आवश्यकता पड़ती है, वह साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में होने वाले उत्पादन का 0.01 हिस्सा है। उधर मध्यम श्रेणी के उद्योग के संचालकों का कहना है कि उन्हें भी केवल 50 फीसद कोयला एसईसीएल की खदानों से मिल रहा, इसलिए उत्पादन घट गया है। मंहगे दर पर कोयला खरीदने से उत्पादन लागत बढ़ गए और सामान महंगे हो गए हैं।

कोयले की कमी को देखते हुए गैर विद्युत क्षेत्र में आपूर्ति मुश्किल से हो रही है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों व कोयले पर आधरित सभी उत्पाद कंपनियों को मिश्रण के लिए 10 फीसद कोयला आयात करने कह दिया है। एनटीपीसी तो 45 लाख टन कोयला आयात करने निविदा भी जारी कर दिया है। 10 फीसद आयात होने से लघु उद्योगों को पर्याप्त घरेलू कोयला की उपलब्धता की उम्मीद जगी है।

रैक की उपलब्धता की भी चुनौती

कोल इंडिया का घरेलू कोयला भाड़े के साथ लगभग चार हजार टन है, वहीं विदेशी कोयले का न्यूनतम दर 17 हजार रुपये प्रति टन है। उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि विदेशी कोयले की आपूर्ति के बाद बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता से संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही अघोषित कटौती की चल रही समस्या से भी निजात मिलेगा। हालांकि अभी भी कोयला आपूर्ति के लिए पर्याप्त रैक की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है। सवाल यह है कि यदि कोयला का उत्पादन बढ़ भी जाए, तो आपूर्ति के लिए रैक कहां से आएंगे।

250 कैप्टिव विद्युत संयंत्रों में भी संकट

छत्तीसगढ़ में 250 से अधिक कैप्टिव विद्युत संयंत्रों पर आधारित उद्योग संचालित हैं। इसके लिए हर साल 320 लाख टन कोयले की आवश्यकता है। यह एसईसीएल के उत्पादन का 19 फीसद हिस्सा है। देश में होने वाले कोयला उत्पादन में एसईसीएल की भागीदारी 25 फीसद है, पर कोल इंडिया की प्राथमिकता केवल बिजली सेक्टर है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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