बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। उसलासपुर रेलवे स्टेशन में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक आलोक कुमार निरीक्षण करने वाले थे। सोमवार को होने वाली इस जांच की तैयारी तीन दिन पहले से चल रही थी। आलम यह था कि हर छोटी-छोटी कमियों को दूर कर दिया गया। सोमवार को कर्मचारी निरीक्षण का इंतजार कर रहे थे। इस बीच पता चला कि जीएम नहीं आ रहे हैं। इससे उन्हें निराशा हुई।

महाप्रबंधक का उसलापुर में वार्षिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि उनके आने की सूचना केवल इंजीनियरिंग विभाग को थी। विभाग ने सभी को इसकी जानकारी दी और तैयारियां शुरू कर दी। स्टेशन का ऐसा कोई कर्मचारी नहीं था, जो स्टेशन को साफ व व्यवस्थित करने में कोई कसर छोड़ा हो। इससे पहले कभी भी स्टेशन इतना स्वच्छ या व्यवस्थित नजर नहीं आया। यात्री भी हैरान थे और सुकून महसूस कर रहे थे। स्टील की कुर्सियां लगे इतने दिन हो गए पर उसमें नंबरिंग तक नहीं हुई थी। लेकिन निरीक्षण के कारण सभी में नीले रंग का टेग लग गया। इसके कारण कुर्सियां अच्छी दिख रही थीं।

साथ ही एक रिकार्ड भी मिल गया कि इस स्टेशन में यात्रियों की बैठक क्षमता कितनी है। सबसे व्यवस्थित वाटर बूथ की नजर आई। टूटी टाइल्स बदल दी गई थी। इसके साथ ही जिन बूथों में नलों का नंबर मिट या था, उसे लिखाया गया। स्वच्छता की तो बात ही अलग थी। यात्री सोच रहे थे कि आए दिन अव्यवस्था और गंदगी पसरे रहने वाला यह स्टेशन इतना चकाचक कैसे नजर आ रहा है। इसके बाद ही यह बात सामने आई कि महाप्रबंधन यहां का निरीक्षण करेंगे।

जोन के मुखिया यदि स्टेशन का निरीक्षण करते हैं और किसी तरह की खाामियां मिली गईं तो संबंधित विभाग के अधिकारी की खैर नहीं होती। यही वजह है कि इंजीनियरिंग विभाग ने अपने हिस्से के सारे कार्य पूरे कर लिए। आइओडब्ल्यू भी तीन तक जुटा रहा। पूरी तैयारी करने के बाद सोमवार को दिनभर महाप्रबंधक के आने का इंतजार करने लगे।

यात्रियों ने कहा-रोज पहुंचे जीएम

यात्रियों का कहना था कि जीएम साहब को प्रतिदिन स्टेशन का निरीक्षण करना चाहिए। कम से कम स्टेशन की व्यवस्था तो सुधरेगी। बाकी दिनों में तो कोई सुध लेने वाला नहीं रहता था। उनके आने की खबर से कम से कम रेलवे अमले ने स्टेशन की कमियां तो ठीक हो गई। इसी तरह की सुविधा से यात्रियों को राहत मिलती है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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