Bilaspur News : बिलासपुर। भगवान अपने भक्तों पर अंहकार को हावी नहीं होने देते इसलिए जब इंद्र के मन में अंहकार आया तो श्रीकृष्ण ने इनके अंहकार को समाप्त करने के लिए गोवर्धन पर्वत का पूजा करने की नई परंपरा की शुरूआत की। आज भी भाईदूज के बाद के बाद गोवर्धन पूजा की परंपरा है। उक्त उद्गार वृंदावन से आए पं. अरुण कुमार शास्त्री ने ठाकुरपारा तखतपुर में सुनील ठाकुर के निवास में आयोजित ज्ञान यज्ञ में कही।

उन्होंने कहा कि कंस भी अंहकार का ही प्रतीक है। उसका वध कर अंहकार को समाप्त किया गया। उन्होंने कहा अहंकार ही मानव के पतन का कारण है। इसलिए समभाव प्रेमभाव होनी चाहिए। जीवन में भक्ति ही ऐसा मार्ग है जिससे भगवान को पाया जा सकता है। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा है। इसे सुनने के लिए देव भी आतुरहते हैं। इसके सुनने मात्र से पुण्य लाभ होता है। इसमें जीवन में आने वाले सभी कष्टों के उपाए निदान है। उतार चढ़ाव जीवन में अनुतरित है परंतु धैर्य और भक्ति से ही प्राप्त किया जा सकता है।पं. शास्त्री ने श्रीमद् भागवत कथा की सार सुनाते हुए कहा भगवान धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। वे दीन दुखियों के कष्ट को हर लेते हैं।

पं. शास्त्री ने रूखमणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जगत में एक संदेश देने का कार्य किया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा है। श्रद्धा भक्ति से ही भगवान को प्राप्त किया जा सकता हैै। प्रपंच से हरि को प्राप्त नहीं किया जा सकता। इस अवसर पर कथा सुनने संसदीय सचिव व विधायक रश्मि सिंह ठाकुर व जिप सदस्य जितेंद्र पांडेय, नपा अध्यक्ष प्रतिनिधि , मुकिम अंसारी, बिहारी देवांगन, घनश्याम शिवहरे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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