बिलासपुर- कोरबा। Education News: शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में दाखिला शुरू करने के आदेश जारी किए हैं। पर विस्तृत दिशा-निर्देश नहीं होने से स्कूलों में असमंजस की स्थिति निर्मित हो रही। छोटी कक्षाओं में तो निश्शुल्क प्रवेश होगा पर नवमीं से आगे की कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों से प्रवेश शुल्क लेना है या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

पिछले वर्ष कोरोनाकाल में लाकडाउन के बीच शिक्षा सत्र पूरी तरह निश्शुल्क कर दिया गया था। इस बार प्रवेश व बोर्ड से संबंधित अन्य शुल्क विद्यार्थियों से जमा कराना है या नहीं, इसे लेकर शासकीय हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में संशय की स्थिति बनी हुई है। नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है और इस बार पहली से आठवीं व 11वीं के छात्रों को स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग से आदेश भी जारी कर दिया गया है। संबंधित स्कूल विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश देंगे।

लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में जारी आदेश में केवल दाखिला शुरू करने कहा गया है पर प्रवेश व अन्य शुल्क पर विस्तृत दिशा-निर्देश नहीं दीए गए हैं। इससे स्कूलों में संशय की स्थिति है कि विद्यार्थियों से प्रवेश व बोर्ड से संबंधित शुल्क लेना है या नहीं। कक्षा 11वीं में छात्रों को 15 अगस्त तक प्रवेश दिया जा सकेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ रहे ऐसे बच्चे, जिनकी उम्र छह साल हो गई है, उन्हें पहली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। प्रवासी मजदूरों के बच्चों को भी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। प्रवासी मजदूरों के बच्चों की जानकारी क्वारंटीन सेंटर से ली जाएगी।

पिछ्ले साल कई स्कूलों ने वापस किए शुल्क

पिछले साल एडमिशन की प्रक्रिया शुरू करते हुए कुछ स्कूलों ने विद्यार्थियों से प्रवेश व अन्य शुल्क जमा करा लिए थे। बाद में पालकों को आपत्ति शुरू हुई और शासन ने निश्शुल्क शिक्षा व प्रवेश के निर्देश दिए तो रकम लौटानी पड़ी थी। प्रवेश, परीक्षा व बोर्ड समेत यह शुल्क करीब 500 रुपये होता है।

प्रवेश के बाद ही योजनाओं का लाभ

विभाग से जारी पत्र में स्पष्ट कर दिया है कि जनरल प्रमोशन स्कूलों में दिया गया है, लिहाजा सभी बच्चों को अगली कक्षा में प्रवेश दे दिया जाए। अगली कक्षा में प्रवेश के बाद ही बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ जैसे मध्याह्न भोजन, साईकिल, गणवेश, पाठ्य-पुस्तक मिल सकेगा, लिहाजा उन्हें अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाना जरूरी है।

केवल शिक्षण शुल्क ही लें निजी स्कूल

इसी तरह प्राइवेट स्कूल के बंद होने के बाद जो बच्चे स्कूल में पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं, उनका भी दाखिला सरकारी स्कूलों में किया जाएगा। निजी स्कूलों को दीए गए निर्देश में केवल शिक्षण शुल्क लेने की बात कही गई है।

Posted By: sandeep.yadav

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