बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

अरपा नदी में बारहों माह पानी रहे इसके लिए सिंचाई विभाग ने इसमें हसदेव नदी से पानी लाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए मिनी माता बांगो बांध के ऊपर विभाग अपना एक बैराज बनाएगा। इसमें पानी रोककर उसे दो नदियों को पार कराने के बाद अरपा तक लाया जाएगा।

कोरबा जिले में बहने वाली हसदेव नदी में सालभर पानी रहता है। बांगो बांध में उसे रोकने के बाद भी अतिरिक्त पानी आगे नदी में बह जाती है। ऐसे में सिंचाई मंत्री रविंद्र चौबे के निर्देश पर हसदेव के पानी को अरपा तक लाने की कार्ययोजना बनाई गई है। सिंचाई विभाग ने इसका प्रारंभिक आंकलन कर टोप्पो सीट के अनुसार पानी लाने का रूट तय कर लिया है। सबसे पहले बांगो बांध के ऊपर विभाग एक बैराज बनाकर पानी रोकेगा। उस पानी को कोरबा की तान नदी, अहिरन नदी से पार कराते हुए केंदा क्षेत्र में बहने वाली जेवस नदी में छोड़ा जाएगा। जेवस का पानी प्राकृतिक रूप से बहकर अरपा नदी में मिल जाता है। इस तरह हसदेव के पानी को सालभर अरपा नदी में डाला जाएगा। इससे गर्मी के दिनों में भी अरपा में पानी का बहाव बना रहेगा। इसके अलावा बारिश के दिनों में जब हसदेव में ज्यादा बाढ़ रहता है, तब भी उस पानी को अरपा में डायवर्ट करके बाढ़ की आशंका को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इस रूट में तान नदी में एक जगह पर और पानी रोकने के लिए बैराज का निर्माण किया जाएगा। शेष जगहों पर विशाल पाइप लाइन के जरिए पानी आएगा। इससे पानी की बर्बादी भी नहीं होगी। जेवस नदी अरपा-भैंसाझार बैराज के ऊपर आकर मिलती है। इस तरह गर्मी में अरपा-भैंसाझार बैराज भी लबालब रहेगा। इस महत्वाकांक्षी योजना पर सिंचाई विभाग ने प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। अब डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए कंसलटेंट की मदद लेने की तैयारी है। पूरा प्रोजेक्ट बनकर तैयार होने के बाद उसे मंजूरी के लिए सेंट्रल वाटर कमीशन को भेजा जाएगा। केंद्र से प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद योजना पर काम चालू होगा।

न सिंचाई न उद्योगों को पानी

ओडिशा ने छत्तीसगढ़ की सिंचाई परियोजनाओं पर आपत्ति करते हुए केंद्र से अनुरोध कर ट्रिब्यूनल का गठन करा दिया है। अब यहां हर परियोजना पर इसी ट्रिब्यूनल में आपत्ति की जाती है। इससे प्रदेश का सिंचाई प्रोजेक्ट लटकने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए हसदेव से पानी लाने की योजना में अधिकारियों ने न तो सिंचाई करने का प्रावधान किया है और न ही उद्योगों को पानी देने का। यह विशुद्घ रूप से एक सूखी नदी में सालभर पानी लाने की कवायद है।

जलस्तर ऊंचा रखने में मिलेगी मदद

अरपा में सालभर पानी लाने का सबसे बड़ा फायदा नदी किनारे बसी आबादी को होगा। गर्मी के दिनों में नदी का पानी सूख जाने से आसपास जलस्तर भी रसातल में चला जाता है। विशेषकर बिलासपुर शहर में। जलस्तर नीचे जाने से यहां पेयजल संकट की स्थिति बन जाती है। माना जा रहा है कि अरपा में सालभर पानी रहने से शहर का जलस्तर भी ऊंचा रहेगा।

बाढ़ का खतरा होगा कम

हसदेव नदी में सालभर पानी बहता है। इसे बांगो बांध में रोककर सिंचाई की जाती है और उद्योगों को दिया जाता है। इसके बाद भी बड़ी मात्रा में पानी बिना उपयोग के आगे बहा दिया जाता है। बांध के ऊपर पानी रोककर उसे अरपा में डायवर्ट कर देने से बाढ़ का खतरा हसदेव में कम रहेगा। यह नदी जोड़ो अभियान का ही एक हिस्सा है। इसके तहत हसदेव से अरपा और अहिरन से खूंटाघाट बांध को जोड़ने की कवायद हो रही है।

मंत्री के निर्देश पर शुरू हुआ काम

सिंचाई मंत्री चौबे ने अहिरन से खूंटाघाट तक पानी लाने की योजना के अलावा अधिकारियों को हसदेव से अरपा तक पानी लाने का भी प्रोजेक्ट तैयार करने कहा था। जमीन के अनुसार जब अध्ययन किया गया तो अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट को संभव होना पाया है।

हसदेव नदी से अरपा तक पानी लाने की योजना पर हमें काम करने के लिए कहा गया था। इसके बाद जमीन के अनुसार अध्ययन करने पर पता चला है कि तान नदी और जेवस नदी से होते हुए पानी अरपा तक लाया जा सकता है। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे मंजूरी के लिए सीडब्ल्यूसी को भेजा जाएगा। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही इस पर काम चालू हो पाएगा।

एके तिवारी

कार्यपालन अभियंता, कोटा संभाग