बिलासपुर। वर्षा ऋतु में संक्रामक बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसमें युवा से लेकर बुजुर्ग और बच्चे सभी प्रभावित होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संक्रामक रोग से बचाव क लिए डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा के जरिए लोगों को जागस्र्क करने का काम शुरू किया है। विभाग के मैदानी अमले द्वारा लोगों को संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय बता रहे हैं और सावधानी रखने सतर्क भी कर रहे हैं।

खासकर छोटे उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान देने की हिदायत भी दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा चलाया जा रहा है। जो पांच जुलाई तक चलेगा। इस दौरान लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि छोटे बच्चे जिनकी उम्र पांच वर्ष तक की है उनके लिए यह कितना खतरा होता है।

डायरिया इस उम्र के बच्चों के लिए जानलेवा भी साबित होता है। डायरिया के कारण बच्चों की मृत्यु दर में वृद्धि भी हो रही है। डायरिया का रोकथाम कर मृत्यु दर में कमी लाने की कोशिश भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही है। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डायरिया से होने वाली मृत्यु की रोकथाम के उद्देश्य से गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है।

शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, तालापारा से इसकी शुस्र्आत की गई है। पखवाड़ा अवधि के दौरान जिले एवं विकासखंड स्तर पर स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में मास्क पहनना, शारीरिक दूरी एवं हाथ धोने के सही तरीकों के विषय में बताया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों व समुदाय में ओआरएस एवं जिंक की गोलियों का वितरण किया रहा है। माताओं को घर पर ओआरएस बनाने की विधि,वितरण और उपयोग एवं डायरिया के पहचान एवं खतरों के लक्षणों के बारे में बताया जा रहा है।

निचली बस्ती इलाकों पर विशेष ध्यान

डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा निकायों के निचली बस्ती इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्षा के दौरान पानी निकासी की सुविधा ना होने के कारण जल भराव की स्थिति बनी रहती है। जल भराव के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है। स्लम बस्तियों में कैंप के जरिए सावधानी बरतने और सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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