Health Tips: बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि) ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम और सांस की समस्या से बचना है तो छोटे बच्चों से लेकर युवा व बुजुर्गों को योगाभ्यास की जलनेति क्रिया करनी चाहिए। इससे कफ साफ हो जाता है। सांस लेने की कोई तकलीफ नहीं होती है। जलनेति क्रिया से शरीर को पूरी तरह राहत मिलेगी।

योग विशेषज्ञ व अटल बिहारी विश्वविद्यालय बिलासपुर के योग साइंस विभाग के प्रोफेसर सत्यम तिवारी ने बताया कि जलनेति में नमकीन जल का उपयोग होता है। इससे नाक के अंदर झिल्ली में रक्त प्रवाह बढ़ता है। साथ ही बाहरी प्रदूषण से सुरक्षित रहता है। इस क्रिया को करने के लिए नमकीन गुनगुने पानी का उपयोग किया जाता है। इस क्रिया में पानी को नेति पात्र की मदद से नाक के एक छिद्र से डाला जाता है और दूसरे से छिद्र से निकाला जाता है। फिर इसी क्रिया को दूसरे नास्ट्रिल से किया जाता है। जलनेति दिन में किसी भी समय कर सकते हैं।

यदि किसी को जुकाम हो तो इसे दिन में कई बार कर सकते हैं। इस क्रिया का लगातार अभ्यास नासिका क्षेत्र में कीटाणुओं को पनपने नहीं देता। इसके लिए आधा लीटर गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाया जाता है। नेति के बर्तन में गर्म पानी को भर लें। अब आप कागासन में बैठें। पैरों के बीच डेढ़ से दो फीट की दूरी रखें। कमर से आगे की ओर झुकें। नाक का जो छिद्र उस समय अधिक सक्रिय हो, सिर को उसकी विपरीत दिशा में झुकाएं। फिर नाक के एक छिद्र में नेति पात्र की नली से पानी डालें। पानी धीरे-धीरे डालें। इस दौरान मुंह खुला रखें और लंबी सांस न लें।

यह पानी नाक के दूसरे छेद से निकलना चाहिए। इसी प्रक्रिया को नाक के दूसरे छेद से करें। दोनों छेद से यह प्रक्रिया करने के बाद सीधे खड़े हो जाएं और कपालभाती अभ्यास को करें। इससे नाक के अंदर का सारा पानी, बैक्टीरिया और म्यूकस बाहर आ जाता है। यह क्रिया नाक की सफाई करती है। इससे सांस नली संबंधी परेशानी, पुरानी सर्दी, दमा, सांस लेने में होने वाली समस्या को दूर हो जाती है। इसके अलावा आंखों में पानी आना और आंख में जलन की समस्या कम होती है। कान और गले को बीमारियों से बचाती है। सिरदर्द, अनिद्रा, सुस्ती में जलनेति करना फायदेमंद होता है।

Posted By: Abrak Akrosh

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