बिलासपुर। Bilaspur News : छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के अध्यक्ष अमित जोगी की पत्नी ऋचा जोगी की याचिका पर सोमवार को चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साधुके डिवीजन बेंच में रिट याचिका की सुनवाई हुई। बिलासपुर- आज उच्च न्यायालय में ऋचा अमित जोगी का मामला सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस रामचंद्र मेनन एवं जस्टिस पी पी साहू के बेंच में लिस्ट हुआ था। ऋचा जोगी के वकील ने माननीय न्यायालय से दिल्ली से वरिष्ठ अधिवक्ता लेकर सुनवाई करवाने के लिए एक सप्ताह के लिए समय की मांग की।

इस पर कोर्ट ने समय दे दिया है। ज्ञात हो कि ऋचा जोगी ने जाति संबंधी अधिनियम के संसोधन को चुनौती दी थी। इसके साथ ही साथ जाति प्रमाण पत्र के निलंबन को चुनौती दी थी। जाति प्रमाण पत्र का निलंबन संत कुमार नेताम की शिकायत पर हुआ था। सोमवार को संतकुमार नेताम की तरफ से सुदीप श्रीवास्तव एवं संदीप दुबे उपस्थित हुए, जबकि ऋचा जोगी की तरफ से गेरी मुखोपाध्याय उपस्थित हुए।

बताते चलें कि ऋचा जोगी ने अपने वकील के जरिए हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें बताया है कि वर्ष 1950 के पहले से उनके पूर्वज मुंगेली के पास ग्राम पेंड्री में निवास करते आए हैं और दस्तावेजों में गोंड जाति दर्ज है। सत्ताधारी दल कांग्रेस पर जाति प्रमाणपत्र रद करवाकर मरवाही उपचुनाव लड़ने देने से रोकने का आरोप लगाया है। उनके पति अमित जोगी और ससुर स्व. अजीत जोगी मरवाही से विधायक रहे हैं। ससुर अजीत जोगी के निधन के कारण मरवाही सीट में उप चुनाव में उम्मीदवारी के चलते सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी विद्वेष की भावना से काम करते हुए जाति प्रमाण पत्र को जिला स्तरीय छानबीन समिति के जरिये निलंबित करा दिया है, ताकि वह चुनाव न लड़ पाएं।

ऋचा जोगी ने आरोप लगाया है कि उनको चुनाव से लड़ने से रोकने की योजना के तहत जिला छानबीन समिति नोटिस जारी किया है। उन्होंने समिति से सात दिन का समय मांगा था क्योंकि दस्तावेज पंजीयक कार्यालय में हैं। उसे लेने के लिए आवेदन किया है, पर स्टाफ के संक्रमित होने से कार्यालय को बंद कर दिया गया था।

आदिवासी नेता संतकुमार नेताम ने कैविएट फाइल कर जताई थी आशंका

आदिवासी नेता संतकुमार नेताम ने अपने वकील संदीप दुबे और सुदीप श्रीवास्तव के माध्यम से कैविएट फाइल की थी। इसमें आशंका जताई थी कि ऋचा जोगी अपने जाति के संबंध में मुंगेली जिला जाती छानबीन समिति के नोटिस को चुनौती दे सकती हैं। ऐसे में अगर कोर्ट में याचिका लगाई जाती है, तो केविएटर के पक्ष को भी सुना जाए।

Posted By: Shashank.bajpai

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