बिलासपुर। बेहतर जांच के बाद आतंकियों के मददगारों को सजा दिलाने वाले एएसपी राजेंद्र जायसवाल को केंद्रीय गृह मंत्रालय से मेडल की घोषणा की गई है। इनके साथ ही प्रदेश के एक एसआइ और एक निरीक्षक को भी मेडल के लिए चुना गया है। शुक्रवार को इसकी घोषणा गृह मंत्रालय से की गई है।

बिलासपुर में एएसपी सिटी के पद पर पदस्थ राजेंद्र जायसवाल 2012-13 में उरला सीएसपी के पद पर थे। इस दौरान उन्हें इनपुट मिला कि रायपुर के उरला क्षेत्र में कुछ लोग आतंकी संगठनों को मदद कर रहे हैं। आतंकी मददगारों का संबंध पाकिस्तानी आतंकियों और उनके भारतीय मददगारों से है। इसके बाद पुलिस की टीम ने धीरज साव को गिरफ्तार कर लिया। धीरज साव के खाते में आतंकी मददगार स्र्पये जमा कराते थे। इसमें से वह अपना कमिशन काटकर बाकि स्र्पये आतंकियों के बताए खाते में भेजता था।

धीरज की गिरफ्तारी के बाद आयशा खान और जुबेर अहमद को भी गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने मामले की जांच का जिम्मा तत्कालीन सीएसपी राजेंद्र जायसवाल को सौंपा। उन्होंने मामले की जांच कर केस डायरी न्यायालय में सौंप दी। न्यायालय में सुनवाई के बाद एक साल पहले तीनों आरोपित को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई है। इसी मामले में एएसपी राजेंद्र जायसवाल को केंद्रीय गृह मंत्रालय से मेडल की घोषणा की गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों और टीम के साथ मिला इनाम

इनाम मिलने की घोषणा के बाद एएसपी राजेंद्र जायसवाल ने कहा कि उन्होंने केवल अपना काम किया है। उन्हें यह इनाम वरिष्ठ अधिकारियों से मिले दिशा निर्देश और उनकी टीम में शामिल साथियों की वजह से मिला है। एएसपी जायसवाल ने कहा कि किसी भी काम में वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देश और टीम के साथियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में भी उन्हें अधिकारियों का सहयोग मिला। साथ ही टीम के साथियों ने अपनी भूमिका निभाई।

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