बिलासपुर।High Court News: हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर होने के बाद जिला प्रशासन ने शासकीय जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की सुनवाई के दौरान शासन ने भरोसा दिलाया है कि तीन माह के भीतर जमीन को शासन के कब्जे में ले लिया जाएगा। इस जवाब के बाद हाई कोर्ट ने जनहित याचिका को निराकृत कर दिया है। साथ ही छह माह के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर याचिकाकर्ता को दोबारा कोर्ट आने की छूट दी है।

मामला कांकेर जिले के पखांजूर का है। यहां रहने वाले देवाशीष राय ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें बताया गया कि गांव के प्रेमदास ने करीब दस एकड़ शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है, जिसमें उनके द्वारा मछली पालन कराया जा रहा है। इस जमीन का हिस्सा वन भूमि में आता है। साथ ही इसमें से कुछ हिस्से को स्कूल भवन के लिए आबंटित किया गया है।

इस जमीन पर ग्रामीणों की निस्तारी होती है और आम रास्ता भी है। लेकिन, इस पर अतिक्रमण कर डबरी बना दिया गया है। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। याचिकाकर्ता व ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत एसडीएम सहित स्थानीय प्रशासन से की थी। लेकिन, शासकीय जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इससे परेशान होकर उन्हें न्याय के लिए हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन व कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस बीच मामले की सुनवाई लंबित थी। मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा की युगलपीठ में मामले की सुनवाई के दौरान शासन ने जवाब में बताया कि अतिक्रमण की गई शासकीय भूमि को वापस लेने की प्रक्रिया चल रही है। अधिकांश जमीन को वापस ले ली गई है। वहीं शेष भूमि को भी तीन माह के भीतर अतिक्रमण मुक्त करा लिया जाएगा। शासन के इस जवाब से संतुष्ट होकर कोर्ट ने याचिका को निराकृत कर दिया है।

Posted By: anil.kurrey

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