बिलासपुर। High Court News: दुर्ग के एमजीएम स्कूल में अधिक फीस वसूली के खिलाफ जनहित याचिका पर गुस्र्वार को सुनवाई हुई। इस दौरान पता चला कि शासन, स्कूल व सीबीएसई ने अब तक जवाब नहीं दिया। इस पर कोर्ट ने उन्हें जवाब देने के लिए छह सप्ताह की मोहलत दी है।

एमजीएम स्कूल में ली जा रही फीस को बहुत अधिक बताते हुए दुर्ग निवासी जयंत देशमुख ने जनहित याचिका दायर की है। पूर्व में स्कूल के खिलाफ जनहित याचिका लगी थी। इस दौरान शासन के जवाब से संतुष्ट होकर हाई कोर्ट ने जनहित याचिका को निराकृत कर दिया था। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उचित कार्रवाई नहीं करने पर दोबारा जनहित याचिका लगानी पड़ी।

याचिका में कहा गया है कि एमजीएम स्कूल प्रबंधन द्वारा मनमाने तरीके से फीस वसूली की जा रही है। जबकि शासन ने निजी स्कूलों के फीस का निर्धारण किया है। फिर भी इस तरह से आदेशों को दरकिनार कर दिया गया है। इस तरह से शासन का स्कूल प्रबंधन का किसी भी प्रकार का कोई नियंत्रण नही हैं। इस मामले की शिकायत शिक्षा विभाग से की गई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जबकि पूर्व में दायर याचिका पर राज्य शासन ने ऐसे स्कूलों पर लगाम कसने की बात कही थी। लेकिन शासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने पर याचिकाकर्ता को दोबारा न्याय के लिए हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। अधिवक्ता मलय श्रीवास्तव के माध्यम से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन, सीबीएसई व स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

गुस्र्वार को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए इस मामले की सुनवाई हुई। लेकिन अभी तक इस मामले में पक्षकारों ने जवाब नहीं दिया है। इस दौरान शासन व सीबीएसई के वकील ने समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने छह सप्ताह में उन्हें जवाब प्रस्तुत करने कहा है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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