बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दिनों में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में लगातार प्रकरणों की सुनवाई हो रही है। अर्जेंट हियरिंग के तहत सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं को कोर्ट द्वारा राहत भी पहुंचाई जा रही है। इसी कड़ी में अवकाश के दिन हाई कोर्ट खुला। चीफ जस्टिस के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल ने डिवीजन बेंेच का गठन किया। जस्टिस संजय के अग्रवाल व जस्टिस पीपी साहू ने अर्जेंट हियरिंग के दो प्रकरणों की सुनवाई की। दोनों ही प्रकरणों में याचिकाकर्ताओं को राहत दी है।

योजना एवं सांख्यिकी विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत प्राची मिश्रा ने अधिवक्ता टीके झा के जरिए अर्जेंट हियरिंग के तहत प्रकरण की सुनवाई के लिए रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय में आवेदन जमा किया था। रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय द्वारा इस संबंध में चीफ जस्टिस एके गोस्वामी को सूचना दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस ने डिवीजन बेंच का गठन कर प्रकरण की सुनवाई के निर्देश दिए।

चीफ जस्टिस के निर्देश के बाद डिवीजन बेंच में याचिकाकर्ता प्राची मिश्रा के मामले की सुनवाई प्रारंभ हुई। याचिकाकर्ता के वकील टीके झा ने राज्य शासन द्वारा वर्ष 2015 में बनाई गई तबादला नीति की जानकारी देते हुए कहा कि शासन द्वारा बनाई गई नीति में यह स्पष्ट लिखा है कि प्रदेश के अति दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं, दिव्यांगों व 55 वर्ष से अधिक उम्र के शासकीय कर्मचारियों का तबादला नहीं किया जाएगा।

राज्य शासन की इन नीति का पालन नहीं किया जा रहा है। याचिकाकर्ता महिला है और उनका तबादला अति दुर्गम आदिवासी इलाके में कर दिया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस अग्रवाल व जस्टिस साहू की डिवीजन बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य शासन द्वारा तबादला आदेश पर रोक लगा दिया है। कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हंै।

याचिकाकर्ता ने अपनी बीमारी की दी जानकारी

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि वह बीमार रहती हैं। उनकी तबियत ठीक नहीं रहती। रायपुर के एक अस्पताल में इलाज कराने की जानकारी भी दी है। याचिका के अनुसार राज्य शासन ने तबादला आदेश जारी करते वक्त उनको जानकारी भी नहीं दी है। डिवीजन बेंच ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है।

Posted By: anil.kurrey

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