बिलासपुर। विभागीय जांच में दोषमुक्ति के बाद भी वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति न देने के शासन के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने सचिव सामान्य प्रशासन व सचिव राजस्व विभाग को नोटिस जारी कर याचिकाकर्ता तहसीलदार को डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नति देने वरिष्ठता के विवाद का निराकरण करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को विभाग के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने कहा है। इसके साथ ही याचिका को निराकृत कर दिया है।

महासमुंद निवासी शंकरलाल सिन्हा, राजस्व विभाग में तहसीलदार के पद पर पदस्थ थे। उनके साथ भर्ती हुए समस्त अन्य तहसीलदार का वर्ष 2016 में डिप्टी कलेक्टर के पद पर प्रमोशन हो गया परन्तु इनके खिलाफ विभागीय जांच लंबित होने के कारण उन्हें प्रमोशन से वंचित कर दिया गया। सिन्हा के विरूद्ध लगाये गये समस्त आरोप अप्रमाणित होने पर सचिव राजस्व विभाग द्वारा उन्हें अगस्त 2018 में समस्त आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया परंतु वर्ष 2016 से डिप्टी कलेक्टर के पद पर प्रमोशन न देकर वर्ष 2021 में प्रमोशन दिया गया। राज्य शासन के इस आदेश को चुनौती देते हुए वकील अभिषेक पांडेय के जरिए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने कहा है कि उनके साथ भर्ती हुए समस्त तहसीलदारों को वर्ष 2016 में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्न्ति दे दी गई है। उनके विरूद्ध विभागीय जांच लंबित होने के कारण उन्हें वर्ष 2021 में इस पद पर प्रमोशन दिया गया है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके विरुद्ध विभागीय जांच के लिए विभाग द्वारा जितने आरोप तय किए गए थे जांच के बाद एक भी प्रमाणिक नहीं हो पाया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जब उनको दोषमुक्त कर दिया गया है तो उनकी पदोन्नति आदेश भी पूर्व की तिथि के अनुसार किया जाना चाहिए। रिट याचिका की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सचिव सामान्य प्रशासन विभाग एवं सचिव राजस्व विभाग को नोटिस जारी कर निर्देशित किया कि वे याचिकाकर्ता की विभागीय जांच में दोषमुक्ति के आधार पर उक्त पद पर वर्ष 2016 से डिप्टी कलेक्टर पद की वरिष्ठता हेतु प्रकरण का निराकरण करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को विभाग के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने कहा है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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